BrahMos a unique example of continuity in governance

शासन में निरंतरता का एक अद्वितीय प्रमाण ब्रह्मोस

नई दिल्ली, 12 मई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की ओर ध्यान आकर्षित किया है। ब्रह्मोस उन रिपोर्टों के बाद सुर्खियों में आया है, जिनमें कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका इस्तेमाल किया गया था।
एक्स पर एक लंबी पोस्ट में, जयराम रमेश ने मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान की आदत के विपरीत कहा, ‘ब्रह्मोस शासन में निरंतरता का एक उल्लेखनीय प्रमाण है।’
उन्होंने पोस्ट में लिखा ‘‘ब्रह्मोस इन दिनों काफी चर्चा में है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को मिलाकर रखा गया है। यह भारत-रूस सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह शासन में निरंतरता का एक और अद्वितीय प्रमाण भी है-जिसे नकारा नहीं जा सकता, भले ही आज दिल्ली की सत्ता प्रतिष्ठा इसे मिटा देने की लगातार कोशिश करे।’’
रमेश ने कहा ‘भारत का एकीकृत प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम 1983 में शुरू हुआ था, और इसने कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। 1990 के दशक के मध्य में, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और उनके सहयोगियों जैसे डॉ. शिवथानु पिल्लई ने रूस के साथ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए साझेदारी की आवश्यकता महसूस की। इसके परिणामस्वरूप 12 फरवरी 1998 को एक inter-governmental समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जब इंदर कुमार गुजराल भारत के प्रधानमंत्री थे। गौरतलब है कि वे 1976-80 के बीच सोवियत संघ (USSR) में भारत के राजदूत भी रह चुके थे। इसके बाद पहला औपचारिक अनुबंध 9 जुलाई 1999 को हुआ, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। पहला सफल परीक्षण 12 जून 2001 को हुआ था।

डिजाइन, सिमुलेशन और एयरोस्पेस ज्ञान से जुड़ी सुविधाओं वाले ब्रह्मोस मुख्यालय परिसर का उद्घाटन दिसंबर 2004 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा नई दिल्ली में किया गया था।

इसके बाद ब्रह्मोस मिसाइल को 2005 में भारतीय नौसेना और 2007 में भारतीय थलसेना में शामिल किया गया। इसकी वायु-प्रक्षेपणीय (एयर-लॉन्च्ड) संस्करण 2012 में सामने आया। यह सब उस समय हुआ जब डॉ. मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे। उन्हीं की नेतृत्व में 2005 में ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता हुआ, जिसने भारत के लिए मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्हीं के कार्यकाल में हैदराबाद में ब्रह्मोस इंटीग्रेशन कॉम्प्लेक्स और तिरुवनंतपुरम में ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड की स्थापना भी हुई।