Sarafraj

मध्यप्रदेश में भी है रंगीन मछलियों का बीज फार्म

घर को सुंदर बनाने में गृहणियों की पसंद फिश एक्वेरियम भी होता है। यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि फिश एक्वेरियम की रंगीन मछलियों के बीज भी फार्म में ही उत्पन्न होते है।

ऐसी ही करीब 30 प्रकार की रंगीन मछलियों की प्रजाति का उत्पादन केंद्र सरफराज खान ने मत्स्य विभाग के सहयोग से खरगोन के प्रेमनगर में वर्ष 2009 में शुरू किया था। वे खरगोन में ओंडल नदी पर मछलियों को दाना खिलाने जाया करते थे।

खराब आर्थिक स्थिति के कारण सरफराज खान ने ठेला लेकर शहर के फुटपाथ पर मात्र 550 रूपए के 7 फिश पॉट से अपना रंगीन मछली फार्म बनाने के सपने को साकार करने के लिए पहला कदम रखा।

वर्ष 2009 में सरफराज को मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना द्वारा 8 लाख का लोन और 90 हजार रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ। इससे इन्होंने रंगीन मछलियों का बीज उत्पादन केंद्र बना लिया।

उन्होंने खरगोन शहर के पास के गांव प्रेमनगर में एक एकड़ जमीन खरीदी और फार्म तैयार किया। इसके लिए कुआं खुदवाया और ट्यूबवेल पंप की व्यवस्था भी की। इसके बाद इन्हें विभाग द्वारा भुवनेश्वर की केंद्रीय फ्रेशवॉटर एक्वॉकल्चर संस्थान, मरीन प्रोडॅक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के कोच्ची केंद्र और नई दिल्ली में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।

इसका परिणाम यह हुआ कि सरफराज  का  फार्म मध्यप्रदेश का पहला  रंगीन मछली बीज उत्पादन केंद्र बन गया।

मध्यप्रदेश में रंगीन मछली बीज उत्पादन के केवल 2 केंद्र है। उनमें से एक के मालिक सरफराज खान है जो प्रदेश में पहला है। सरफराज प्रदेश में 7 फ्रेंचाइजी के सहयोगी हैं और खरगोन में इनका सुंदर-सा फिश हॉउस भी है।

फार्म में गोल्ड फिश, एंजल, चिचलेड, मौली, गप्टी और कार्प, कामन कॉर्प सहित प्लेटी प्रजाति की कई प्रकार की मछलियां है। इनकी एक-एक प्रजाति में 100-100 प्रकार की मछलियां होती है। उनको इस बात की ज्यादा खुशी है कि एक समय वो ओंडल नदी में मौली और गप्टी को दाना खिलाते थे। आज वो बैंकाक की कार्प, ब्रुजल और एंजल तथा एक दर्जन से अधिक रंगीन मछलियों को दाना देते है।

सरफराज के फार्म की मछलियां अब मुंबई, चेन्नई और कलकत्ता के बाजार की शोभा हैं। अब सरफराज  प्रतिमाह 40 से 50 हजार की कमाई करने के साथ 5 लोगों को रोजगार भी  देरहे है।

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