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कृषि में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी : आर्थिक सर्वेक्षण

पुरूषों का गांव की तरफ से शहर में पलायन होने की वजह से महिलाओं की हिस्सेदारी कृषि के क्षेत्र में बढ़ रही है। इसकी वजह से महिलाएं कृषि को लेकर विभिन्न भूमिकाओं में दिख रही है। मसलन किसान, उद्यमी और श्रम में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है।
यह बात आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 में कही गई है जिसे सोमवार को केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने संसद के पटल पर प्रस्‍तुत किया।

वैश्विक स्तर पर देखा गया है कि महिलाओं ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में और स्थानीय जैव व कृषि को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका को निभाया है। ग्रामीण महिलाओं ने विभिन्न तरीके के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए प्रबंधन का एकीकृत ढांचा विकसित किया है जिससे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी की जाती हैं। अब जरूरत इस बात की है कि महिलाओं तक जमीन, पानी, क्रेडिट और प्रौद्योगिकी पहुंच बढ़ाई जाए।

भारत की स्थिति देखते हुए ग्रामीण महिलाओं को कृषि को लेकर प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। महिलाओं को अधिकार दिए जाने के बाद कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है। महिला किसानों को अधिकार दिलाने को लेकर सरकार ने कई कदम उठाए है। महिलाओं को मुख्यधारा की कृषि में लाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं –

• सभी योजनाओं, कार्यक्रमों और विकास संबंधित गतिविधियों में किए जाने वाले आवंटन में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत निर्धारित किया जाना सुनिश्चित किया गया है।

• लाभदायक कार्यक्रमों, योजनाओं , महिला केंद्रित गतिविधियों पर जोर देने की शुरूआत की गयी है।

• क्षमता विकास गतिविधियों और छोटी बचत के जरिए महिला स्वयं सहायता समूह पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विभिन्न निर्णय लेने वाले निकायों में उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए उन्हें तमाम तरीके की सूचनाएं मुहैया कराने के इंतजाम किए गए हैं।

• कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने प्रत्येक वर्ष 15 अक्टूबर को महिला किसान दिवस घोषित किया है।

• उत्पादकता बढ़ाने के लिए महिलाओं की कृषि मूल्य कड़ी की उत्पादन, फसल पूर्व, कटाई, पश्च प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपरण से सभी स्तरों पर अधिपत्य होने के चलते महिलाओं की विशिष्ट भागीदारी जरूरी है। छोटी खेत जोत क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण कार्याकल्प में सक्रिय एजेंटों के रूप में महिलाओं को जोड़ना और लैंगिक विशेषता के चलते विस्तार सेवाओं में पुरूषों व महिलाओं को लगाने के लिए समावेशी परिवर्तनकारी कृषि नीति महिला विशिष्ट हिस्सेदारी पर लक्षित होना चाहिए।

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