गोरखपुर (फतेहाबाद) ,17 जून 2025 । भारत के परमाणु ऊर्जा निगम (NPCIL) द्वारा हरियाणा के फतेहाबाद ज़िले में स्थापित किए जा रहे गोरखपुर हरियाणा अनु विद्युत परियोजना (GHAVP) के पहले रिएक्टर यूनिट-1 के लिए पहला कंक्रीट कार्य अक्टूबर 2025 में शुरू किया जाएगा। यह जानकारी केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दी है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चार प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) स्थापित किए जाने हैं, जिनकी क्षमता 700 मेगावॉट (MWe) प्रति यूनिट होगी। इन्हें दो चरणों में बनाया जाएगा।
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने वर्ष 2015 में गोरखपुर में इस परियोजना के लिए साइटिंग लाइसेंस जारी किया था और 2018 में यूनिट 1 और 2 के लिए खुदाई कार्य शुरू करने की अनुमति भी दे दी थी। हालांकि, उस समय यह अनुमान था कि यूनिट-1 का कंक्रीट कार्य 2019 में शुरू होगा और निर्माण में लगभग साढ़े पाँच वर्ष लगेंगे। AERB ने वर्ष 2020 में कंक्रीट डालने की सैद्धांतिक सहमति दे दी थी।
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अनुसार, केंद्रीय मंत्री खट्टर ने 14 जुलाई को परियोजना स्थल का दौरा किया और निर्माण प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यूनिट-1 के लिए पहला कंक्रीट अक्टूबर 2025 तक डाला जाएगा। इसके बाद जून 2030 तक यूनिट-1 की पहली “क्रिटिकलिटी” (परमाणु श्रृंखला प्रक्रिया की शुरुआत) हासिल करने और मार्च 2031 तक व्यावसायिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। यूनिट-2 को यूनिट-1 के छह महीने बाद चालू करने की योजना है।
भारतीय सरकार की आधिकारिक स्थिति में गोरखपुर यूनिट 1 और 2 को “निर्माणाधीन” श्रेणी में रखा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की PRIS डाटाबेस के अनुसार, रिएक्टर का निर्माण तभी माना जाता है जब रिएक्टर भवन की आधारशिला पर पहला प्रमुख कंक्रीट डाला जाए।
गोरखपुर की यूनिट 3 और 4 को दूसरे चरण में निर्मित किया जाएगा। ये यूनिट्स भारत सरकार की “फ्लीट अप्रोच” योजना के तहत स्वीकृत दस रिएक्टरों में शामिल हैं, जिनमें राजस्थान के माही बांसवाड़ा (यूनिट 1-4), कर्नाटक के कैगा (यूनिट 5-6), मध्यप्रदेश के छुटका (यूनिट 1-2) भी शामिल हैं।
वर्तमान में भारत में कुल 24 परिचालित परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता 8.88 गीगावॉट (GW) है। इसके अलावा, 6 नए रिएक्टर – कुल 4,768 मेगावॉट – निर्माणाधीन हैं। भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाने का है।(WNN)
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