Indian currency note

दस लाख रुपये नकदी रखने को अपराध घोषित किया जाना चाहिए

चेन्नई, 14 नवंबर| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बेंगलुरू) के प्राध्यापक आर. वैद्यनाथन का कहना है कि सरकार को भ्रष्टाचार पर रोकथाम के लिए अपनाए जाने वाले बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत 10 लाख रुपये नकदी रखने को अपराध घोषित कर देना चाहिए।

वैद्यनाथन ने कहा, “विमुद्रीकरण सिर्फ एक कदम है। सरकार को 10 लाख रुपये या इससे अधिक राशि नकद रखने को भी अपराध घोषित कर देना चाहिए। मौजूदा कानून के तहत यह अपराध नहीं है। किसी व्यक्ति को इतनी बड़ी राशि नकद रखने की क्या जरूरत है?”

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को कर अदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कर की दर में कटौती और छोटे नोटों का प्रचलन बढ़ाना भ्रष्टाचार से निपटने के अन्य तरीके हैं।

आईआईएम बेंगलुरू में वित्त के प्राध्यापक वैद्यनाथन ने आईएएनएस को बताया कि अनुमान के मुताबिक, देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का पांच प्रतिशत हर वर्ष काले धन के रूप में होता है। छह लाख करोड़ रुपये की समानांतर अर्थव्यवस्था छोटी नहीं होती।

वैद्यनाथन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को अवैध घोषित किए जाने के फैसले के प्रति समर्थन जाहिर किया।

उन्होंने कहा, “मैं विमुद्रीकरण की बात 2012 से ही कह रहा हूं। मैंने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की चुनावी राजनीति देखी है। निर्वाचन आयोग ने वहां बड़ी राशियां जब्त कीं। इसी वर्ष मई में हुए विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने तमिलनाडु में करीब 100 करोड़ रुपये जब्त किए।”

वैद्यनाथन ने कहा कि अवैध रूप से धन जमा करने वाले चूंकि काले धन की जमाखोरी करते हैं, जिसके कारण नए नोट छापने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी निर्देश सिर्फ वसूली का जरिया बनकर रह गया है, इसलिए नौकरशाहों और मंत्रियों को दिए गए विवेकाधिकार खत्म कर दिए जाने चाहिए और शासन व्यवस्था सख्त रूप से कानून आधारित होना चाहिए।–आईएएनएस

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