नई दिल्ली, 20 जून 2025 – भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया उपकरण बनाया है, जो सिर्फ सूरज की रोशनी की मदद से पानी से हरित (ग्रीन) हाइड्रोजन बना सकता है। यह ईंधन पूरी तरह साफ-सुथरा है और इससे न तो प्रदूषण होता है, न ही कार्बन गैस निकलती है। इसका उपयोग कार, फैक्टरी और बिजली बनाने जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।
यह काम बेंगलुरु के सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) के वैज्ञानिकों ने किया है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आता है।
वैज्ञानिकों की टीम ने इस उपकरण को कुछ खास सामग्री और तकनीक से तैयार किया है, जो जमीन पर आसानी से मिल जाती हैं। यह मशीन सूरज की रोशनी से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बांट देती है, और इस तरह हाइड्रोजन गैस बनती है।
इस नई तकनीक की खास बात यह है कि यह पूरी तरह सौर ऊर्जा पर काम करती है और इसमें कोई भी महंगा या जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला या तेल) नहीं लगता।
इस उपकरण की प्रमुख विशेषताएं:
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सूरज की रोशनी को अच्छे से सोखने की क्षमता
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तेज गति से ऊर्जा का प्रवाह और कम नुकसान
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लंबे समय तक काम करने की क्षमता – 10 घंटे तक लगातार चला और सिर्फ 4% काम में गिरावट आई
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कम लागत वाली सामग्री से बना
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बड़ी मात्रा में भी बनाना संभव
इस खोज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है और इसे रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की प्रसिद्ध पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
इस शोध का नेतृत्व कर रहे डॉ. आशुतोष सिंह ने कहा, “हमने स्मार्ट तरीके से सस्ती सामग्री को जोड़कर एक ऐसा उपकरण बनाया है, जो बड़े पैमाने पर सस्ती हाइड्रोजन ऊर्जा तैयार कर सकता है।”
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इस तकनीक से घरों और कारखानों के लिए हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा बनाना संभव हो जाएगा — और वो भी पूरी तरह सूर्य की रोशनी से।
यह भारत के लिए हरित ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
चित्र : एनआईहेटेरोजंक्शन फोटोएनोड का योजनाबद्ध चित्रण, जो कुशल सौर जल विभाजन के लिए चार्ज ट्रांसफर पथ दिखाता है। इनसेट इमेज में बड़े क्षेत्र के फोटोएनोड (25 सेमी वर्गाकार) को सौर ऊर्जा के तहत हाइड्रोजन उत्पन्न करते हुए और इसकी सतह फोटोवोल्टेज प्रतिक्रिया को मजबूत फोटो–इलेक्ट्रोकैटेलिटिक गतिविधि और मापनीयता को प्रदर्शित करते हुए दिखाया गया है।
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