Iran-Israel confrontation: Khamenei announces successor

ईरान-इज़राइल टकराव, खामेनेई ने घोषित किए उत्तराधिकारी

ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। लड़ाई के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करते हुए, हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में 21 जून, 2025 को आई खबरों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आपातकालीन सैन्य योजनाओं के तहत तीन वरिष्ठ मौलवियों को अपना संभावित उत्तराधिकारी नामित कर दिया है। माना जा रहा है कि खामेनेई इस समय राजधानी तेहरान के बाहर एक सुरक्षित बंकर में हैं और किसी विश्वसनीय दूत के माध्यम से ही सैन्य अधिकारियों से संपर्क में हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न की जा सके।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने सैन्य कमांड की श्रृंखला में भी कई प्रतिस्थापन अधिकारियों को तय किया है, ताकि इज़रायली हमलों की स्थिति में नेतृत्व में कोई शून्यता न आए।

इसी बीच, 13 जून को इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य हमला किया था, जो 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के बाद से सबसे गंभीर माना जा रहा है। इस्फ़हान के पास स्थित एक परमाणु अनुसंधान केंद्र को भी लक्षित किया गया।

यूरोप के विदेश मंत्रियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच जिनेवा में हुई वार्ता विफल रही। बातचीत की टेबल पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। हालाँकि ईरान के अधिकारियों ने कहा है कि वे बातचीत को तैयार हैं, बशर्ते इज़राइल अपने हमले रोक दे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं और अपने सैन्य सहयोग को लेकर विचार कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के लिए यह संघर्ष न सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति बल्कि वैश्विक स्थिरता को लेकर भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध पूरी तरह फैल गया, तो यह पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर सकता है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है – खासकर तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से।

फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें जिनेवा, वाशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हैं – और एक बड़ा सवाल बना हुआ है – क्या कूटनीति इस बार भी युद्ध को रोक सकेगी?