विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने एक नए अध्ययन में चेतावनी जारी करते हुए देशों की सरकारों से आग्रह किया है कि बिना देरी किए, तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों में सभी प्रकार के ज़ायक़ों का इस्तेमाल बन्द करना होगा. तम्बाकू सेवन की वजह से हर वर्ष 80 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है.
एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में 13-15 वर्ष आयु वर्ग के 3.7 करोड़ बच्चे तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं.
कई देशों में, ई-सिगरेट का इस्तेमाल का इस्तेमाल करने वाले युवाओं की संख्या, वयस्कों के आँकड़े से भी अधिक है.
ज़ायके के जाल में
इन ई-सिगरेट, हुक्कों, सिगार, बिना धुँए वाले तम्बाकू जैसे कई उत्पादों में चॉकलेट, शहद, मेंथॉल, अंगूर, चैरी समेत अन्य ज़ायकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी संख्या 16 हज़ार तक है.
मार्केटिंग के ज़रिये इन उत्पादों को बढ़ाया जाता है और सोशल मीडिया पर इनके विज्ञापनों की भरमार है, जिन्हें तीन अरब से अधिक बार देखा जा चुका है.
इनका आकर्षक, मिठास भरा स्वाद ही सबसे बड़ी वजह है कि बच्चों व किशोरों में निकोटिन और तम्बाकू का सेवन करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है.
ये स्वाद ही, स्वास्थ्य के लिए ख़राब इन तम्बाकू उत्पादों को युवाओं की पसंद में बदल रहा है.
एक बार सेवन शुरू करने के बाद उसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है, विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए, और फेफड़ों समेत अन्य गम्भीर बीमारी की भी वजह बन सकता है.
लत की नई लहर
WHO ने 31 मई को ‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ के अवसर पर अहम तथ्य व सामग्री जारी की है, जिसमें सचेत किया गया है कि तम्बाकू कम्पनियाँ बचाव उपायों के बावजूद नई तिकड़में अपना रही हैं.
संगठन ने आगाह किया कि तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोग, कैंसर की वजह बनने वाले रसायनों की चपेट में आ सकते हैं और इसलिए उनके लिए सख़्त नियम ज़रूरी हैं.
यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने अपने सन्देश में कहा कि ये स्वाद, लत की एक नई लहर को हवा दे रहे हैं और इन्हें रोका जाना होगा. यदि साहसिक क़दम नहीं उठाए गए तो ये लुभाने वाले ज़ायक़े में छिपी यह लत जारी रहेगी.
50 से अधिक देशों ने ज़ायके वाले तम्बाकू के इस्तेमाल पर पाबन्दी थोपी हुई है, जबकि 40 से अधिक देशों ने ई-सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया है.
बेल्जियम, डेनमार्क, लिथुएनिया समेत अन्य देश बचाव के लिए क़दम उठा रहे हैं, मगर यूएन स्वास्थ्य संगठन ने सभी देशों से उनका अनुसरण करने की पुकार लगाई है. चन्द अहम उपाय:
- ज़ायक़े के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगाना
- उत्पादों को बढ़ावा देने विज्ञापनों पर रोक लगाना
- सार्वजनिक स्थलों पर निकोटीन व तम्बाकू के इस्तेमाल को रोकना
WHO ने कहा है कि कड़े नियमों के ज़रिये ऐसे तम्बाकू उत्पादों की अपील को हटाना होगा, ताकि भावी पीढ़ियों को इनसे बचाया जा सके. “तम्बाकू व निकोटिन उद्योग को, अपनी तिकड़मों से लोगों को अपने जाल में न फँसने दें.”(यूएन समाचार)
Follow @JansamacharNews


