Electric vehicles

वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल

वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक कारों Electric vehicles के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया जारहा हे।

हाल ही में भारत सरकार ने बिजली से चलने वाली कारों Electric vehicles के ख़रीदारों और निर्माता कंपनियों को 1.4 अरब डॉलर की सहायता मुहैया कराने की घोषणा की।

सरकार की ओर से प्रस्तावित 1.4 अरब डॉलर में से 1.2 अरब डॉलर की राशि सब्सिडी के तौर पर दी जानी है जबकि 14 करोड़ डॉलर से कारों को रिचार्ज करने का ढांचा तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुल जनसंख्या का 92 फ़ीसदी हिस्सा – लगभग 4 अरब लोग – वायु प्रदूषण के ख़तरनाक स्तर का सामना कर रहे हैं जिससे उनके स्वास्थ्य को ख़तरा है।

वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक नई रिपोर्ट में नीतियों में बदलाव के 25 सुझाव दिए गए हैं और इनमें इलेक्ट्रिक कारों Electric vehicles के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी शामिल है।

Photo courtesy : UN News/Yasmina Guerda

चालकरहित और बिजली से चलने वाली कार.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर सरकारें इन सुझाव को मान लें तो प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अन्य महंगे विकल्पों से बचा जा सकता है।

बाक़ी बची राशि से प्रशासनिक और विज्ञापन संबंधी ज़रूरतों को पूरा किया जाने की योजना है।

भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सार्वजनिक परिवहन में बिजली से चलने वाले वाहनों Electric vehicles की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक हो।

 

मौजूदा समय में भारत में इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली सिर्फ़ दो कंपनिया हैं, टाटा मोटर्स और महिंद्रा।

इनके अलावा ह्यूंडई और किया मोटर्स जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनिया भारतीय बाज़ार की ज़रूरतों के अनुसार इलेक्ट्रिक कार Electric vehicles विकिसत कर रही हैं।

किया मोटर्स ने भारत में आंध्र प्रदेश राज्य की सरकार के साथ एक सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत राज्य में बिजली चालित वाहनों को बढ़ावा देने में सहायता दी जाएगी।

हैदराबाद, चेन्नई और गुवाहाटी सहित भारत में कई बड़े शहर सार्वजनिक परिवहन के लिए बिजली से चलने वाली बसों के परीक्षण की योजना पर काम कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में एशिया-पैसेफ़िक के क्षेत्रीय निदेशक डेशेन त्सेरिंग ने कहा कि भारत के निजी क्षेत्र ने इलेक्ट्रिक कारों को बनाने में काफ़ी दिलचस्पी दिखाई है लेकिन बैटरी के महंगे दाम एक बड़ी समस्या हैं।

 

 

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डवेलपमेंट (ICIMOD) में क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक, अर्निको कुमार पांडे का मानना है कि एशिया में टैक्स के ज़रिए इलेक्ट्रिक वाहनों Electric vehicles को बढ़ावा देना संभव है।

उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए बताया कि जहां पेट्रोल या डीज़ल से चलने वाली कार ख़रीदते समय 220 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है लेकिन इलेक्ट्रिक कारों Electric vehicles के लिए यह सिर्फ़ 10 फ़ीसदी है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण (UNEP) का ई-मोबिलिटी कार्यक्रम उभरती अर्थव्यवस्थाओं सहित सभी देशों को इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाने में समर्थन देता है। (संयुक्त राष्ट्र समाचार)

— जनसमाचार द्वारा संपादित फीचर

 

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