No one will be able to detect Indian drones

भारतीय ड्रोन को कोई नहीं कर सकेगा डिटेक्ट

गौतमबुद्धनगर, 31 अगस्त। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब जब भारतीय ड्रोन उड़ेंगे तो उन्हें न अमेरिका और न चीन, कोई डिटेक्ट नहीं कर पाएगा—यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

गौतमबुद्धनगर में शनिवार को रक्षा उपकरण एवं इंजन टेस्ट फैसिलिटी आईडीईएक्‍स विजेता स्टार्ट-अप, ‘राफे एमफाइबर’ की अत्याधुनिक परीक्षण सुविधा का उद्घाटन करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलती युद्ध रणनीतियों में ड्रोन का प्रयोग अनिवार्य हो गया है।

ड्रोन की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि अब ड्रोन उन क्षेत्रों में भी तैनात किए जा रहे हैं जहां बड़े उपकरण नहीं पहुंच सकते।

रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ड्रोन रक्षा नीति का अहम हिस्सा हैं और भारत अब खुद डिजाइन और निर्माण कर रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने पोखरण परमाणु परीक्षण से लेकर आज तक कभी भी दबावों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही भारत की रक्षा और स्वाभिमान का आधार है। रेफी एम फाइबर जैसे स्टार्टअप इसका प्रमाण हैं कि हमारा नारा अब जमीन पर परिणाम दिखा रहा है।

इस मौके पर उन्होंने संस्थान के संस्थापकों विशाल मिश्र और विवेक मिश्रा की उपलब्धि को भारत की नई तकनीकी क्रांति का प्रतीक बताया।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि नोएडा रक्षा नवोन्‍मेषण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है, चाहे वह स्टार्टअप्स के माध्यम से हो, विनिर्माण उद्यमों के माध्यम से हो, या उच्च-तकनीकी समाधानों के माध्यम से हो। उन्होंने कहा, ‘‘नवोन्‍मेषण के सभी क्षेत्रों में, नोएडा अग्रणी भूमिका निभा रहा है।’’

अपने दौरे के दौरान, रक्षा मंत्री ने महत्वपूर्ण उन्नत परीक्षण और विनिर्माण अवसंरचना – एक इंजन परीक्षण केंद्र और एक धातु योजक विनिर्माण सुविधा केन्‍द्र से लेकर 2,800°सेल्सियस तक पहुंचने में सक्षम भट्टियों तक, एक उन्नत मिश्रित पॉलिमर विनिर्माण केंद्र, साथ ही विभिन्न प्रकार के ड्रोन – पेलोड-ड्रॉप ड्रोन, स्वार्म ड्रोन और सटीक-निर्देशित मिसाइल ड्रोन – का अवलोकन किया। ये अत्याधुनिक, अत्यधिक विश्वसनीय प्रणालियां भारत की रक्षा तैयारियों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार उपस्थित थे।