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महात्मा गांधी नरेगा में राजस्थान देश में प्रथम

जयपुर, 11 फरवरी। महात्मा गांधी नरे­गा (मनरेगा) के तहत रोजगार देने में राजस्थान पूरे देश में प्रथम स्थान पर हैं। वर्तमान में प्रदेश में 15 लाख 52 हजार 932 लोगों को मनरेगा के तहत प्रतिदिन रोजगार दिया जा रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार मनरेगा के तहत रोजगार देने में तमिलनाडु दूसरे नंबर पर और आंध्र प्रदेश तीसरे नंबर पर है। जबकि पश्चिमी बंगाल चौथे नंबर पर है। 9 फरवरी 2017 तक के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में मनरेगा पर वित्तीय वर्ष 2016-2017 में अब तक 4250 करोड़ रुपये श्रम और सामग्री पर खर्च हो चुके हैं। इसमें से 3600 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की तरफ से जबकि 650 करोड़ रुपये राजस्थान सरकार की तरफ से खर्च हुए हैं।

राज्य में सबसे ज्यादा मनरेगा के तहत बाड़मेर में मजदूर कार्य कर रहे हैं। बाड़मेर में 1 लाख 37 हजार 81 लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया जा रहा है। वहीं भीलवाड़ा दूसरे स्थान पर है, यहां पर 1 लाख 7 हजार 926 मजदूरों को रोजगार प्रतिदिन दिया जा रहा है। जबकि डूंगरपुर में ये आंकड़ा 1 लाख 7 हजार 910 मजदूरों का है। वहीं अजमेर में प्रतिदिन 1 लाख 4 हजार 155 लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मनरेगा के आयुक्त देवाशीष पुष्टि के मुताबिक मनरेगा में मांग आधारित कार्य में कोई कमी नहीं आने दी जा रही है, साथ ही बजट में कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि मजदूरी सीधे खातों मे ऑनलाइन दी जा रही है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-2018 के लिए मनरेगा के लिए 48000 करोड़ के बजट का प्रावधान रखा है। जबकि बीते वित्तीय वर्ष 2016-2017 में यह धनराशि 38500 करोड़ रुपये थी।
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