भारत के एआई शासन दर्शन के आधार सात सूत्र बताए गए हैं।
ये सात सिद्धांत मिलकर एक सुसंगत और संतुलित एआई शासन ढांचा स्थापित करते हैं जो विश्वास, समानता और जवाबदेही की रक्षा करते हुए नवाचार को सक्षम बनाता है। ये जन-केंद्रित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार एआई पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। तकनीकी प्रगति को सामाजिक मूल्यों और विकासात्मक प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर, यह ढांचा बड़े पैमाने पर जिम्मेदार एआई अपनाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।
भारत के एआई शासन दर्शन के आधार सात सूत्र बताए गए हैं। ये सूत्र नीचे दिये गए है :
1. विश्वास ही आधार है
नवाचार, अपनाने और प्रगति के समर्थन के साथ-साथ जोखिम कम करने के लिए विश्वास आवश्यक है। विश्वास के बिना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ बड़े पैमाने पर प्राप्त नहीं किए जा सकेंगे। विश्वास को पूरी मूल्य श्रृंखला में अंतर्निहित होना चाहिए – अंतर्निहित तकनीक में, इन उपकरणों का निर्माण करने वाले संगठनों में, पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदार संस्थानों में, और इस विश्वास में कि व्यक्ति इन उपकरणों का जिम्मेदारी से उपयोग करेंगे। इसलिए, विश्वास वह मूलभूत सिद्धांत है जो भारत में सभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और तैनाती का मार्गदर्शन करता है।
2. जनता प्रथम
एआई प्रशासन में जनता को केंद्र में रखा जाना चाहिए। एआई प्रणालियों को इस तरह विकसित और तैनात किया जाना चाहिए जिससे मानवीय सक्रियता मजबूत हो और जो सामाजिक मूल्यों का प्रतिबिंब हो। प्रशासन के दृष्टिकोण से, इसके लिए यह आवश्यक है कि जहां तक संभव हो, एआई प्रणालियों पर मनुष्यों का सार्थक नियंत्रण बना रहे, जिसे प्रभावी मानवीय निगरानी द्वारा समर्थित किया जाए। जन-प्रथम दृष्टिकोण क्षमता निर्माण, नैतिक सुरक्षा और सुरक्षा संबंधी विचारों पर भी जोर देता है।
3. संयम पर नवाचार को वरीयता
एआई-आधारित नवाचार सामाजिक-आर्थिक विकास, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और लचीलेपन जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए, एआई शासन ढांचे को सक्रिय रूप से इसे अपनाने को प्रोत्साहित करना चाहिए और प्रभावी नवाचार के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना चाहिए। इसके साथ ही, नवाचार को जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए और इसका उद्देश्य संभावित नुकसान को कम करते हुए समग्र लाभ को अधिकतम करना होना चाहिए। अन्य सभी चीजें समान होने पर, सावधानीपूर्वक संयम की तुलना में जिम्मेदार नवाचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
4. निष्पक्षता और समानता
समावेशी विकास को बढ़ावा देना भारत के एआई शासन दृष्टिकोण का प्रमुख उद्देश्य है। एआई प्रणालियों को निष्पक्षता सुनिश्चित करने और समान परिणाम हासिल करने के लिए विशेष रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह या भेदभाव से मुक्त होना चाहिए। साथ ही, सक्रिय रूप से समावेश को बढ़ावा देने और बहिष्कार तथा असमान परिणामों के जोखिम को कम करने के लिए एआई का उपयोग किया जाना चाहिए।
5. जवाबदेही
भारत के एआई इकोसिस्टम की प्रगति विश्वास पर आधारित हो, यह सुनिश्चित करने के लिए, एआई का विकास करने वालों और उसे तैनात करने वालों को पारदर्शी और जवाबदेह बने रहना चाहिए। जवाबदेही को किए गए कार्य, नुकसान के जोखिम और लागू की गई उचित सावधानी की शर्तों के आधार पर स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए। जवाबदेही को विभिन्न नीतिगत, तकनीकी और बाजार-आधारित तंत्रों के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है।
6. डिज़ाइन के अनुसार समझने योग्य
समझने योग्य होना विश्वास कायम करने की मूलभूत आवश्यकता है और यह बाद में जोड़ा गया पहलू नहीं बल्कि मुख्य डिज़ाइन विशेषता होनी चाहिए। यद्यपि एआई प्रणालियाँ संभाव्यता पर आधारित होती हैं, फिर भी जहाँ तक तकनीकी रूप से संभव हो उपयोगकर्ताओं और नियामकों को यह समझने में मदद करने के लिए स्पष्ट व्याख्याएँ और प्रकटन होने चाहिए कि प्रणाली कैसे काम करती है, उपयोगकर्ता के लिए इसका क्या अर्थ है, और इसे तैनात करने वाली संस्थाओं द्वारा अपेक्षित संभावित परिणाम क्या हैं।
7. सुरक्षा, लचीलापन और स्थिरता
एआई प्रणालियों को नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए सुरक्षा उपायों के साथ डिजाइन किया जाना चाहिए और ये मजबूत और लचीली होनी चाहिए। इन प्रणालियों में विसंगतियों का पता लगाने और हानिकारक परिणामों को सीमित करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए। एआई विकास के प्रयास पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संसाधन कुशल होने चाहिए, और छोटे, संसाधन कुशल हल्के मॉडल को अपनाने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।



