भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जो समय के साथ लगभग भुला दी गईं, लेकिन बाद में फिर से खोजे जाने पर उनकी ऐतिहासिक महत्ता सामने आई। ऐसी ही एक अद्वितीय फिल्म है “शिराज”, जो 1928 में रिलीज़ हुई थी और ताजमहल की प्रेमकथा की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
जयपुर में शूट हुई इस फिल्म को ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट ने पुनर्स्थापित किया और लंदन फिल्म फेस्टिवल में फिर से प्रदर्शित किया।
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उस दौर में ब्रिटिश समीक्षकों के लिए यह फिल्म केवल एक प्रेमकथा नहीं थी, बल्कि भारत की संस्कृति, स्थापत्य कला और भव्यता को देखने का एक सिनेमाई माध्यम भी बन गई थी। समय बीतने के साथ यह फिल्म लगभग गुमनामी में चली गई, लेकिन बाद में ब्रिटिश फिल्म संस्थान (BFI) ने इसे पुनर्स्थापित कर फिर से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। समीक्षकों ने विशेष रूप से ताजमहल और मुगल वास्तुकला से जुड़े दृश्यों को फिल्म का असाधारण आकर्षण बताया है।
“शिराज” पूरी तरह भारत में निर्मित फिल्म है। इसकी शूटिंग 1925 से 1927 के बीच जयपुर में की गई थी। उस समय किसी स्टूडियो सेट या कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था का उपयोग नहीं किया गया था, बल्कि सभी दृश्य प्राकृतिक लोकेशनों और रोशनी में फिल्माए गए थे। फिल्म की एक और खासियत यह है कि इसके सभी कलाकार भारतीय थे।
लगभग 118 मिनट लंबी यह फिल्म 26 सितंबर 1928 को सबसे पहले लंदन में रिलीज़ हुई थी। फिल्म में हिमांशु राय ने शिराज की भूमिका निभाई है, जबकि एनाक्षी रामा राव ने सलीमा और बाद में मुमताज़ महल का किरदार निभाया। चारू रॉय ने प्रिंस खुर्रम, यानी भावी सम्राट शाहजहाँ की भूमिका निभाई, और सीता देवी ने दलिया का पात्र निभाया।
यह फिल्म एक मूक (Silent) फिल्म है जिसका निर्देशन जर्मन फिल्मकार फ्रांज ओस्टेन ने किया था। इसकी कहानी उस समय के प्रसिद्ध नाटककार और पटकथा लेखक निरंजन पाल के इसी नाम के नाटक से रूपांतरित की गई थी।
हालाँकि मूक फिल्मों के प्रति दर्शकों की रुचि धीरे-धीरे कम हो रही थी, इसलिए 1929 में इसका एक ऑडियो संस्करण भी प्रस्तुत किया गया। इस संस्करण में संवाद सुनाई नहीं देते, लेकिन कलाकारों के हावभाव, भावनाएँ और दृश्यात्मक प्रस्तुति कहानी को सहज रूप से समझने योग्य बना देती हैं। इसमें साउंड इफेक्ट्स और एक थीम गीत के साथ समन्वित संगीत भी जोड़ा गया था, जिसने दर्शकों को सिनेमाघरों तक आकर्षित किया।
कहानी
फिल्म की कहानी शिराज नाम के एक युवक की है, जो एक कुम्हार का बेटा है। उसे सेलिमा नाम की लड़की के साथ पाला-पोसा जाता है, जो दरअसल एक शाही परिवार की बच्ची होती है और बचपन में एक हमले से बचाई गई थी।
युवावस्था में शिराज को सेलिमा से प्रेम हो जाता है। लेकिन गुलाम व्यापारियों द्वारा उसका अपहरण कर उसे प्रिंस खुर्रम को बेच दिया जाता है। शिराज उसका पीछा करते हुए आगरा पहुँचता है। अंततः वह सेलिमा को बचाने और उसकी याद में एक भव्य स्मारक बनवाने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर देता है — जो आगे चलकर ताजमहल की कथा से जुड़ जाता है।
ब्रिटिश प्रेस की नजर में “शिराज”
ब्रिटिश प्रेस और कई फिल्म वेबसाइटों ने “शिराज” को ताजमहल की पृष्ठभूमि पर आधारित एक भव्य रोमांटिक महाकाव्य बताया है। वास्तविक भारतीय लोकेशनों पर फिल्माई गई इस मूक फिल्म की दृश्यात्मक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व की व्यापक सराहना की गई है, हालांकि कुछ आलोचकों ने इसकी कथा शैली और तकनीकी सीमाओं की ओर भी संकेत किया है।
ब्रिटेन के फिल्म ब्लॉगों और पोर्टलों ने इसे अपने समय की एक अनोखी अंतरराष्ट्रीय फिल्म परियोजना माना है। ब्रिटिश फिल्म संस्थान के नेशनल आर्काइव ने 2017 में फिल्म को उसके मूल फिल्म तत्वों से पुनर्स्थापित किया। इसके बाद इसका प्रीमियर 2017 के लंदन फिल्म फेस्टिवल में एक विशेष गाला स्क्रीनिंग के रूप में हुआ, जहाँ प्रसिद्ध संगीतकार अनुष्का शंकर द्वारा तैयार और प्रस्तुत किया गया नया संगीत भी शामिल था।
ब्रिटिश अख़बार द गार्डियन के फिल्म समीक्षक पीटर ब्रैडशॉ ने इसकी प्रशंसा करते हुए इसे “एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और आश्चर्यजनक रोमांटिक महाकाव्य” बताया।
पुनर्स्थापन के बाद 2017 के अंत में इस फिल्म का सुधरा हुआ संस्करण भारत के कई शहरों में भी प्रदर्शित किया गया। बाद में 2020 में इसे “वी आर वन: ए ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल” में भी दिखाया गया, जो BFI लंदन फिल्म फेस्टिवल के कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ था। (jansamachar desk)
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