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नई इबारत लिख रही हैं खेतों में मजदूरी करने वाली

खेतों में मजदूरी करने वाली महिलाएं अब अगरबत्ती, पत्तल-दोने और साबुन बना रही हैं। ये महिलायें अपने इन छोटे उद्योगों से खुद की और गांव की गरीबी दूर करने की नई इबारत लिख रही हैं। यह कहानी है बड़वानी जिले के राजपुर ब्लाक के ग्राम सनगांव में 10 स्व-सहायता समूह की 109 महिलाओं की। ये महिलायें अब हर माह औसतन 10 हजार रुपये तक आय अर्जित कर रही हैं। ग्राम संगठन की महिलाओं ने ग्रामसभा में गाँव को गरीबी मुक्त करने का प्रस्ताव पेश किया है।

वर्ष 2012 में इस गाँव में समूह की शुरूआत हुई। शुरूआत में महिलाओं को पुरूषों के विरोध का सामना करना पड़ा। जब चार पैसे घर में आने लगे तो घर के पुरूष भी उन्हें सहयोग करने लगे। छोटे-छोटे ऋण लेकर उन्होने पशुपालन, खेती एवं किराना दुकान का काम शुरू किया। अब लघु उद्योगों को संचालित कर रही हैं।

ग्राम संगठन अध्यक्ष शिवकन्याबाई मोहन, संगठन की बुक कीपर सुधाबाई राधेश्याम और सचिव शांताबाई बद्री के मुताबिक इस प्रयास से आय बढ़ने के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। ये महिलाएं एक दिन में 300 से 400 किलो अगरबत्ती बनाती हैं। ये महिलाएं ‘आजीविका महक’ साबुन बनाती हैं और गांवों के हाट-बाजार में साबुन की ब्रांडिंग भी करती हैं। इंदौर के व्यापारी से अनुबंध के तहत अगरबत्ती और पत्तल-दोने बनाने का कच्चा मटेरियल खरीदती हैं और उत्पाद भी उन्हें ही बेचती हैं।

ग्राम सनगांव की आबादी 2104 है। गांव में 368 परिवार में 302 बीपीएल परिवार हैं। सामाजिक आर्थिक जनगणना 2011 के अनुसार यहाँ 176 परिवार गरीबी की श्रेणी में है। गांव में अगरबत्ती, पत्तल-दोना, साबुन, प्लास्टिक की चूड़ी बनाने का काम समूह की महिलाएं कर रही हैं। इसके अलावा वे पशुपालन, किराना, आटा चक्की, खेती का कार्य भी कर रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में राजपुर ब्लॉक के 97 गांव में 1300 से अधिक समूह संचालित हैं। इन समूहों के माध्यम से अगरबत्ती, पत्तल-दोना, साबुन, श्रृंगार सामग्री, सेनेटरी नेपकिन बनाने का काम किया जा रहा है। सात गांवों में अगरबत्ती और मोमबत्ती निर्माण हो रहा है।

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