नई दिल्ली, 24 जून 2025 — जाँच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि एक घरेलू एयरलाइन की फ्लाइट को टेकऑफ से पहले रद्द करना पड़ा क्योंकि उसके टायर अत्यधिक घिस चुके थे। बाद में टायर बदलने के बाद ही उड़ान को अनुमति दी गई।
यह जानकारी नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) की जाँच में आई। DGCA ने हाल ही में भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर व्यापक और रात्रिकालीन निगरानी अभियान चलाया। यह पहल 19 जून 2025 को आदेश संख्या DGCA-22034/2/2025-FSD के तहत शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य विमानन पारिस्थितिकी तंत्र की गहराई से जांच करना और किसी भी संभावित जोखिम या खामी को समय रहते पहचानना था।
इस विशेष निगरानी अभियान का नेतृत्व डीजीसीए के संयुक्त महानिदेशक कर रहे थे, जिसमें दो अलग-अलग टीमों ने दिल्ली और मुंबई सहित देश के व्यस्ततम हवाई अड्डों पर निगरानी की। निरीक्षण का समय रात और सुबह के दौरान निर्धारित किया गया ताकि अधिकतम यथार्थता के साथ एयरपोर्ट संचालन और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया जा सके।
जांच के दायरे में शामिल क्षेत्र:
- उड़ान संचालन एवं योग्यता
- ग्राउंड हैंडलिंग उपकरण
- एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC)
- कम्युनिकेशन, नेविगेशन एवं निगरानी प्रणाली
- फ्लाइट पूर्व मेडिकल मूल
- रनवे और टैक्सीवे सुरक्षा
- तकनीकी रखरखाव और मरम्मत प्रक्रियाएं
निगरानी के दौरान कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आईं जिनमें कुछ निम्नलिखित हैं:
- तकनीकी और रखरखाव से जुड़ी खामियां
दोषपूर्ण उपकरण बार-बार रिपोर्ट होने के बावजूद उनका स्थायी समाधान नहीं किया गया।
ग्राउंड हैंडलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले बैगेज ट्रॉली, बीएफएल आदि अनुपयोगी हालत में पाए गए।
रखरखाव कार्यों में थ्रस्ट रिवर्सर सिस्टम और फ्लैप स्लैट लीवर को लॉक नहीं किया गया था, जिससे गंभीर सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकता था।
कई मामलों में तकनीकी खामियां लॉगबुक में दर्ज ही नहीं की गईं, जो नियामकीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।
लाइफ जैकेट्स ठीक से अपनी सीटों के नीचे सुरक्षित नहीं पाए गए।
एक विमान में विंगलेट पर लगा रस्ट-प्रोटेक्टिव टेप क्षतिग्रस्त मिला। -
एयरपोर्ट संरचना और उपकरणों में खामियां
रनवे की सेंटर लाइन का पेंट फीका हो चुका था।
टैक्सीवे की हरित प्रकाश व्यवस्था एकतरफा पाई गई।
एयरपोर्ट के आसपास के निर्माण कार्यों का डेटा अपडेट नहीं किया गया था।
रैंप क्षेत्र में कई वाहन बिना स्पीड गवर्नर के पाए गए – इन वाहनों को तत्काल वापस लिया गया और चालकों के एयरसाइड ड्राइविंग परमिट निलंबित किए गए। -
सिम्युलेटर और पायलट प्रशिक्षण की स्थिति
एक फ्लाइट सिम्युलेटर विमान के वास्तविक कॉन्फ़िगरेशन से मेल नहीं खा रहा था।
सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं किया गया था, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता और वैधता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। -
घिसे हुए टायरों के कारण उड़ान रद्द
एक घरेलू एयरलाइन की फ्लाइट को टेकऑफ से पहले रद्द करना पड़ा क्योंकि उसके टायर अत्यधिक घिस चुके थे। बाद में टायर बदलने के बाद ही उड़ान को अनुमति दी गई।
आगे की कार्रवाई:
डीजीसीए ने सभी संबंधित एयरलाइनों और ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं और इसकी लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इन खामियों को नज़रअंदाज़ करना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
भविष्य की योजना:
निगरानी के दौरान मिले संकेतों और खतरों के मद्देनज़र, सिस्टम में खतरों का समय पर पता लगाने के लिए यह निगरानी प्रक्रिया भविष्य में भी नियमित रूप से जारी रहेगी। यह पहल भारत में हवाई यात्रा को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
डीजीसीए, जो भारत में नागरिक उड्डयन का प्रमुख नियामक निकाय है, ने स्पष्ट किया है कि उड़ानों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और वह सभी स्तरों पर गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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