Latest Situation in the Strait of Hormuz, 13 Indian Ships Affected

होर्मुज जलडमरूमध्य के ताज़ा हालत, 13 भारतीय जहाज़ प्रभावित

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आज 9 मई, 2026 तक रिपोर्टों के अनुसार 40 से अधिक भारत की ओर जाने वाले जहाज़ अभी भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। इनमें कच्चा तेल, एलपीजी, एलएनजी और उर्वरक लेकर आने वाले जहाज़ शामिल हैं। लगभग 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज़ भी प्रभावित बताए गए हैं।

Strait of Hormuz इस समय दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में बदल चुका है। अमेरिका-ईरान तनाव, खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और जहाज़ों पर हमलों के कारण यहां से सामान्य व्यापारिक आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में बड़े वाणिज्यिक जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठहर गई है और अनेक तेल टैंकर खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

यह जलडमरूमध्य इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कतर और कुवैत से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल तथा एलएनजी इसी मार्ग से एशिया और यूरोप पहुंचता है।

हाल के सप्ताहों में ईरान समर्थित बलों द्वारा जहाज़ों की जांच, कुछ जहाज़ों की जब्ती, ड्रोन हमलों और समुद्री खदानों की आशंका ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सीमित सैन्य एस्कॉर्ट अभियान भी शुरू किए हैं, लेकिन सामान्य समुद्री व्यापार अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है।

भारतीय जहाज़ों की स्थिति

भारत इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है क्योंकि भारत अपनी तेल और गैस ज़रूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है।

भारतीय नौसेना ने “ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा” के तहत युद्धपोतों और फ्रिगेट्स को तैनात किया है ताकि भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग दिया जा सके। कुछ जहाज़ नौसैनिक सुरक्षा के बीच सफलतापूर्वक भारत पहुंच भी चुके हैं। महाराष्ट्र के देवगढ़ बंदरगाह पर एलपीजी लेकर पहुंचा एक जहाज़ इस दिशा में राहत की खबर माना जा रहा है।

भारत सरकार ने ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए संकटग्रस्त जहाज़ों की सूची तैयार की है। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में ईंधन आपूर्ति स्थिर है, हालांकि तेल विपणन कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

दुनिया पर तेल संकट का असर
इस संकट का असर अब पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया है और कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। कुछ अनुमान तो 150–200 डॉलर तक की संभावना भी जता रहे हैं।

चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि इनकी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। चीन में अप्रैल 2026 के दौरान तेल आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई और ईंधन निर्यात भी दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

ऊर्जा संकट के कारण:
पेट्रोल और डीज़ल महंगे हो रहे हैं
समुद्री माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है
बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ गए हैं
उर्वरक और रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है
वैश्विक महंगाई और मंदी का खतरा बढ़ रहा है

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनी, तो यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसी वैश्विक आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।