Ramlila

विश्व की एक मात्र रामलीला का प्रदर्शन बुरहानपुर में

दोहों, गीतों और शेरो-शायरी पर आधारित विश्व की एक मात्र रामलीला का प्रदर्शन बुरहानपुर में किया जायेगा।

उत्तराखण्ड की भीमताल शैली की यह लीला संयुक्त राष्ट्र संघ, (युनेस्को) द्वारा संरक्षित है।

महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने यह जानकारी देते हुये शनिवार को बुरहानपुर में बताया की 23 से 28 सितम्बर तक लीला प्रदर्शनी और प्रस्तुतियाँ का आयोजन स्थानीय शनवारा में किया जा रहा है।

मथुरा, मधुबनी तथा उत्तराखण्ड के समूहों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जायेंगी।

उन्होंने कहा की लीला का दर्शन हमें जीवन की कठिन चुनौतियों का सामना करने की शक्ति और विवेक प्रदान करता है।

फोटो एक अन्य रामलीला

लीला गाथा की प्रस्तुतियों के तहत मथुरा की मण्डली द्वारा 24 सितम्बर को सीता स्वयंवर में 200 किलो फूलों का उपयोग होगा।

25 और 26 सितम्बर को सीता माँ के मायके मिथिला के पारम्परिक रीति-रिवाजों के साथ सीता स्वयंवर के बाद से लेकर शूर्पणखा संवाद तक की संगीतमय प्रस्तुति होगी।

27 तथा 28 सितम्बर को युनेस्को द्वारा संरक्षित भीमताल शैली की एक मात्र लीला, जिसमें छंदो, दोहों, गीतों शेरो-शायरी और पारंम्परिक संगीत की महक है, आयोजन का आकषर्ण रहेगा।

24 से 28 सितम्बर तक प्रात: 10:30 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक चलने वाली प्रदर्शनी में थाईलैण्ड, इन्डोनेशिया और भारत में उपयोग में लाये जाने वाले रामलीला के मुखौटे, कठपुतलियों, मूर्तियों और चित्रकला एवं कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जायेगा।

कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति विभाग तथा इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है।  

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