प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले अपने मासिक सम्बोधन ‘मन की बात’ की 43वीं कड़ी में कहा कि रमजान का महीना पैगम्बर मोहम्मद साहब की शिक्षा और उनके सन्देश को याद करने का यह अवसर है।
उन्होने कहा कि कुछ ही दिनों में रमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है। विश्वभर में रमज़ान का महीना पूरी श्रद्धा और सम्मान से मनाया जाता है। रोज़े का सामूहिक पहलू यह है कि जब इंसान खुद भूखा होता है तो उसको दूसरों की भूख का भी एहसास होता है। जब वो ख़ुद प्यासा होता है तो दूसरों की प्यास का उसे एहसास होता है।
मोदी ने कहा “पैगम्बर मोहम्मद साहब की शिक्षा और उनके सन्देश को याद करने का यह अवसर है। उनके जीवन से समानता और भाईचारे के मार्ग पर चलना यह हमारी ज़िम्मेदारी बनती है।”
“एक बार एक इंसान ने पैगम्बर साहब से पूछा- “इस्लाम में कौन सा कार्य सबसे अच्छा है?” पैगम्बर साहब ने कहा – “किसी गरीब और ज़रूरतमंद को खिलाना और सभी से सदभाव से मिलना, चाहे आप उन्हें जानते हो या न जानते हो”।
“पैगम्बर मोहम्मद साहब ज्ञान और करुणा में विश्वास रखते थे। उन्हें किसी बात का अहंकार नहीं था। वह कहते थे कि अहंकार ही ज्ञान को पराजित करता रहता है।”
” पैगम्बर मोहम्मद साहब का मानना था कि यदि आपके पास कोई भी चीज़ आपकी आवश्यकता से अधिक है तो आप उसे किसी ज़रूरतमंद व्यक्ति को दें, इसीलिए रमज़ान में दान का भी काफी महत्व है। लोग इस पवित्र माह में ज़रूरतमंदों को दान देते हैं।”
“पैगम्बर मोहम्मद साहब का मानना था कोई व्यक्ति अपनी पवित्र आत्मा से अमीर होता है न कि धन-दौलत से। मैं सभी देशवासियों को रमज़ान के पवित्र महीने की शुभकामनाएँ देता हूँ और मुझे आशा है यह अवसर लोगों को शांति और सदभावना के उनके संदेशों पर चलने की प्रेरणा देगा।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा।
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