Modi

“मैं पूरे देश में पढ़ने और पुस्‍तकालय का आंदोलन देखना चाहता हूं” : मोदी

कोच्चि, 18 जून (जनसमा)। “मैं पूरे देश में पढ़ने और पुस्‍तकालय का आंदोलन देखना चाहता हूं। यह आंदोलन केवल लोगों को साक्षर करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि इसे सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव लाने के वास्‍तविक लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने की कोशिश करनी चाहिए। अच्‍छे ज्ञान की नींव पर ही बेहतर समाज का एक व्‍यापक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए।”

यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कोच्चि में पी.एन. पणिक्‍कर फाउंडेशन के पठन माह समारोह का उद्घाटन करते हुए कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रेष्‍ठ ज्ञान की नींव पर ही बेहतर समाज का निर्माण होता है। डिजिटल साक्षरता के महत्‍व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि उन्‍हें यह जानकर प्रसन्‍नता हुई है कि पणिक्‍कर फाउंडेशन डिजिटल साक्षरता पर जोर दे रहा है।

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the launch of the PN Panicker Reading Day – Reading Month Celebration, in Kerala on June 17, 2017.

उन्होंने कहा कि मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि राज्‍य सरकार ने 19 जून को पठन दिवस के तौर पर घोषित किया है। जाहिर तौर पर इसे लोकप्रिय बनाने के लिए काफी प्रयास करने पड़ेंगे। भारत सरकार ने भी इस फाउंडेशन की गतिविधियों को सहायता प्रदान की है। मुझे बताया गया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान इस फाउंडेशन को 1.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा केरल साक्षरता के क्षेत्र में एक मशाल वाहक और पूरे देश के लिए एक प्रेरणा रहा है।

“पहला 100 प्रतिशत साक्षर शहर और पहला 100 प्रतिशत साक्षर जिला केरल से ही हैं। केरल 100 प्रतिशत प्राथमिक शिक्षा हासिल करने वाला पहला राज्‍य भी था। देश के कुछ सबसे पुराने कॉलेज, स्‍कूल और पुस्‍तकालय भी केरल में ही हैं।

यह अकेले सरकार द्वारा हासिल नहीं किया जा सकता था। इस उल्‍लेखनीय उपलब्धि को हासिल करने में नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने काफी सक्रिय भूमिका निभाई है। केरल ने इस संबंध में लोगों की भागीदारी का एक मिसाल कायम किया है। मैं स्‍वर्गीय श्री पी. एन. पनिकर जैसे लोगों और उनके फाउंडेशन के कार्य की सराहना करता हूं। श्री पी. एन. पनिकर केरल में पुस्‍तकालय नेटवर्क के पीछे भी एक प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्‍होंने यह केरल ग्रंथशाला संगम के जरिये किया जिसकी स्‍थापना उन्‍होंने 1945 में 47 ग्रामीण पुस्‍तकालयों के साथ की थी।”