अति वामपंथी एवं अलगाववादी एक ही भाषा बोल रहे हैं : जेटली

लंदन/नई दिल्ली, 27 फरवरी| केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश के ‘कुछ शैक्षिक परिसरों में विनाश का गठजोड़’ है और अति वामपंथी एवं अलगाववादी एक ही भाषा बोल रहे हैं। लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में शनिवार को अपने एक व्याख्यान में जेटली ने कहा कि इन लोगों को उन लोगों को भी बोलने देना चाहिए, जिनके विचार इनसे अलग हैं।

उन्होंने कहा कि यह उनका निजी विश्वास है कि समाज में अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस होनी चाहिए। लेकिन, उन्होंने साथ ही कहा कि ‘हिंसा कोई तरीका नहीं है।’

दिल्ली स्थित रामजस कालेज के बाहर 22 फरवरी को आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और अन्य छात्र समूहों के बीच हिंसा के बाद जेटली का यह बयान सामने आया है।

एबीवीपी ने रामजस में एक कार्यक्रम का विरोध किया था जिसमें जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर खालिद को भी आमंत्रित किया गया था। खालिद व कुछ अन्य छात्रों पर देश विरोधी नारे लगाने का आरोप है। इन्हें जेल हुई थी। अदालत ने इन्हें जमानत पर रिहा किया था।

जेटली ने कहा, “मेरा निजी विश्वास है कि भारत में, या किसी भी समाज में, अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस होनी चाहिए। अगर आप इस बात में यकीन रखते हैं कि आप अभिव्यक्ति की आजादी के जरिए देश की संप्रभुता पर हमला कर सकते हैं तो फिर जवाब में दूसरी अभिव्यक्ति की आजादी की आवाज सुनने के लिए तैयार रहिए।”

उन्होंने कहा, “हिंसा कोई तरीका नहीं है..किसी भी समूह को हिसा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। एक तरह के विनाश का गठजोड़ है जो आकार ले रहा है। कुछ विश्वविद्यालय परिसरों में अति वामपंथी और अलगाववादी एक ही भाषा बोल रहे हैं। उन्हें इसके खिलाफ विचार रखने वालों को अपना विचार व्यक्त करने देना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “मैं इसे पूरी तरह से आश्चर्यचकित करने वाला पाता हूं कि मैं तो भारत के टुकड़े करने की वकालत करने की आजादी का इस्तेमाल करूं और जो मेरे इस कदम का विरोध करें, वे अभिव्यक्ति की आजादी की राह में बाधा डालने वाले कहे जाएं। यह कैसी बात, उन्हें भी अभिव्यक्ति की आजादी हासिल है।”

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री जितेंद्र सिंह ने जेटली जैसी ही बातें एक समाचार चैनल से कहीं। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी की बातें करने वाले दूसरों को बोलने नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता का अपमान करना फैशन बन गया है।

जितेंद्र सिंह ने टाइम्स नाऊ चैनल से कहा, “अगर यह इस लॉबी की सहिष्णुता का नमूना है तो फिर सोचकर रोंगटे खड़े होते हैं कि वे दूसरों से किस तरह की सहिष्णुता चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई उदारवादी लोकतंत्रों में गणराज्य की अखंडता को नहीं लांघने की एक लक्ष्मण रेखा पाई जाती है।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने जेटली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जेटली छात्र राजनीति से वाकिफ हैं, इसलिए वह इस स्थिति से डर गए हैं।

दीक्षित ने एक समाचार चैनल से कहा, “जेटली छात्र संघ राजनीति में सक्रिय रह चुके हैं। वह स्थिति को समझ रहे हैं और इसीलिए डरे हुए हैं। वह समझ रहे हैं कि आज रामजस में जो हो रहा है वह 70 के दशक जैसा है।”