Cancer

समय पर जांच से गर्भाशय कैंसर का उपचार संभव

यदि गर्भाशय कैंसर का समय पर जांच करके पता लगाया जाए तो इसका उपचार संभव है और महिलाएं लंबे समय तक जीवित रह सकती है और अच्छा जीवन जी सकती है ।उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल व देश के वह क्षेत्र जहां कैंसर के सबसे ज्यादा रोगी है ।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे जी ने गुरूवार को एसोचैम द्वारा आयोजित राष्ट्रीय गर्भाशय कैंसर कांग्रेस का नई दिल्ली में उद्घाटन करते हुए यह जानकारी दी।

उन्होंने कारपोरेट सेक्टर से आग्रह किया कि उनका यह सामाजिक दायित्व है कि वे अपने लाभ का कुछ अंश कैंसर जैसे गंभीर बीमारी को रोकने के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि में अपना बहुमूल्य योगदान दे तथा पीपीपी माडल में केंसर के उपचार के लिए अस्पताल एवं मोबाइल बैंक चलाने में देश के गरीब लोगों की चिकित्सा में अपना योगदान दे सके ।

अस्वस्थ महिलाओं का परिवार की मनोदशा और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। गर्भाशय कैंसर के कई कारण हो सकते है। जैसे एचआईवी संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध, अस्वस्थ जीवन शैली इत्यादि ।

भारत में 3.8 मिलियन अर्थात् 38 लाख लोग कैंसर से ग्रस्त पाए गए तथा इनमें से दो-तिहाई लोग कैंसर के अंतिम चरण तथा नाइलाज स्तर पर पाए गए।

हर वर्ष भारत में कैंसर के कारण लगभग 7 लाख मौतें होती है। कैंसर से पीड़ित इन रोगियों में से 60 प्रतिशत से अधिक रोगी अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव 35 से 65 वर्ष की आयु में होते है।

एसोचैम ने एक अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समस्या, गर्भाशय के कैंसर पर सम्मेलन आयोजित किया है और सर्विकल कैंसर के निदान के लिए राष्ट्रीय जागृति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है ।

भारत सरकार राष्ट्रीय आरोग्य निधि के माध्यम से 27 क्षेत्रीय कैन्सर सेन्टर्स को वित्तीय सहायता दे रही है ताकि गरीब लोगों के कैंसर का निःशुल्क इलाज हो सके। इसके अतिरिक्त, 65 मेडिकल कालेजों में कैन्सर के उपचार की व्यवस्था है। राज्य सरकारों को कैंसर उन्मूलन के लिए हर वर्ष समुचित आर्थिक सहायता दी जाती है ।