नई दिल्ली, 06 जुलाई। भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई-20) का लक्ष्य तय समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि इस उपलब्धि से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण 1.5 प्रतिशत से भी कम था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है। इसी अवधि में एथेनॉल की खरीद 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 1,200 करोड़ लीटर से अधिक होने का अनुमान है। वहीं, देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 421 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है।
सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से वर्ष 2014-15 से अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा लगभग 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ, 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई और किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। सरकार का मानना है कि गन्ने, मक्का और चावल जैसी फसलों से तैयार एथेनॉल के अधिक उपयोग से आयात पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों पर सरकार की सफाई
सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे कई दावों का भी जवाब दिया है। सरकार के अनुसार, ई-20 के कारण वाहन का माइलेज 30 प्रतिशत तक कम होने का दावा सही नहीं है। उसका कहना है कि वास्तविक माइलेज वाहन की स्थिति, रखरखाव और ड्राइविंग के तरीके पर अधिक निर्भर करता है।
सरकार ने यह भी कहा है कि ई-20 से वाहनों के इंजन खराब होने का कोई व्यापक प्रमाण नहीं मिला है। उसका दावा है कि वाहन निर्माताओं और ऑटोमोबाइल अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक परीक्षण के बाद ही ई-20 को मंजूरी दी गई थी।
इसी प्रकार, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-20 के उपयोग से वाहन की वारंटी या बीमा दावे पर कोई असर नहीं पड़ता। पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाए जाने और एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी खर्च होने जैसे दावों को भी सरकार ने भ्रामक बताया है।
वाहन कंपनियों ने भी जताया भरोसा
टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुज़ुकी, हीरो मोटोकॉर्प और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को सुरक्षित बताया है। उनके अनुसार, व्यापक परीक्षणों और लाखों वाहनों के अनुभव में ई-20 से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है।
दुनिया के कई देशों में हो रहा है उपयोग
सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्राज़ील, जापान, कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में भी अलग-अलग अनुपात में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईंधन जरूरतों और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए एथेनॉल मिश्रण जैसे वैकल्पिक ईंधनों की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इसके दीर्घकालिक प्रभावों और उपभोक्ताओं को होने वाले वास्तविक लाभों पर समय-समय पर स्वतंत्र अध्ययन भी आवश्यक रहेंगे।
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