गुरु कुंदन लाल गंगानी : जयपुर घराना कथक के शिल्पकार
गुरु कुंदन लाल गंगानी की विशेषता उनके सिखाने के तरीके और उनकी अपनी परफॉर्मेंस, दोनों में ही झलकती थी। उनका मानना था कि हर स्टूडेंट में अलग-अलग खूबियां होती हैं, इसलिए उन्होंने सिखाने के एक जैसे तरीकों को नहीं अपनाया। इसके बजाय, उन्होंने हर शिष्य को उसकी अपनी खूबियों के हिसाब से धैर्यपूर्वक तैयार किया और धीरे-धीरे उनकी तकनीक, लय, भाव-भंगिमा और मंच पर मौजूदगी को निखारा।
