चर्चा का विषय बना राजस्थान का ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान’

जयपुर, 26 मई (जनसमा)। अपनी कामयाबी की वजह से देश भर में चर्चित मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान मरुभूमि राजस्थान के बहुआयामी कायाकल्प का महा अभियान सिद्ध हो रहा है। अभियान अपनी मंशा में इतना अधिक खरा उतर रहा है कि अब इसकी चर्चा केवल राजस्थान के कोने-कोने तक सीमित नहीं है बल्कि प्रदेश की सरहदों से सटे सभी पड़ोसी राज्यों में भी इसकी तारीफ होने लगी है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अबकी बार ‘मन की बात’ में राजस्थान के इस अभियान का जिक्र आने के बाद पूरे देश में यह अत्यधिक चर्चित लोक अभियानों में शुमार हो चला है। राजस्थान के लिए यह गर्व और गौरव की बात है कि इस अभियान को अब देश भर मेंं लागू किए जाने की पहल होने लगी है। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान केवल जल संरक्षण और बरसाती जल के संग्रहण का अभियान भर नहीं है बल्कि इससे राजस्थान और प्रदेश की जनता से सीधे तौर पर जुड़े वे सारे बुनियादी कारक प्रभावित होंगे जिनकी वजह से अक्सर अकाल की काली छाया से साक्षात होने की विवशता रही है।

यह अभियान गांवों को पानी के मामले में आत्मनिर्भरता देगा। जल की उपलब्धता से पेयजल और सिंचाई सुविधाओं को सम्बल प्राप्त होगा। पशु-पक्षियों के लिए पीने का पानी सुलभ रहेगा। खासकर वन्य जीवों की पीने के पानी की सबसे बड़ी समस्या हल होगी जिसकी वजह से उनका रुख बस्तियों की ओर होता रहा है।

अभियान से वनों की हरियाली अक्षुण्ण बनी रह सकेगी वहीं हरियाली का विस्तार होगा। अरावली और दूसरी सभी प्रकार की वादियों का वैभव लौटेगा।  इससे पेड़-पौधों और जंगलों का संरक्षण-संवर्धन होगा और पर्यावरण संतुलन से जुड़ी गतिविधियों में संतुलन स्थापित होने से बादलों के बरसने लायक जमीन उपलब्ध होगी। इससे वर्षा चक्र की नियमितता कायम हो सकेगी। न केवल हरित क्रान्ति बल्कि श्वेत क्रान्ति और नीली क्रान्ति के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव का नया दौर राजस्थान को तरक्की के कई सोपान देने वाला सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान जल की दृष्टि से ही नहीं बल्कि जगत और लोक जीवन तक के तमाम पहलुओं में हरियाली लाने वाला सिद्ध होगा। यह अभियान इस समय पूरे राजस्थान में जिस द्रुत गति से संचालित होता दिख रहा है उससे प्रदेश भर में यह विश्वास पक्का हो गया है कि यह अभियान राजस्थान का सर्वांगीण कायाकल्प करेेगा, इसमें कोई संदेह नहीं। जनता भी चाहती है कि पानी के मामले में उनके अपने गांव आत्मनिर्भरता पाएं और किसी भी प्रकार की समस्या न रहे। इस अभियान की मंशा और इसके पवित्र उद्देश्यों का ही कमाल है कि राज्य में जनता की उत्साहजनक स्वैच्छिक भागीदारी हर तरफ दर्शायी दे रही है। इसी वजह से बड़ी संख्या में जल संरचनाएं बनकर तैयार हैं और बरसात के आवाहन में जुटी हुई हैं।