विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 5 जुलाई। यूरोप इन दिनों पिछले कई दशकों की सबसे भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी, पुर्तगाल, ग्रीस, हंगरी, रोमानिया और ब्रिटेन सहित अनेक देशों में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। कई स्थानों पर जून और जुलाई के पुराने तापमान रिकॉर्ड टूट चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य हीटवेव नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के कारण अधिक तीव्र और लंबे समय तक चलने वाली गर्मी का संकेत है।
सबसे अधिक प्रभावित देश
स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में कई दिनों से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। इटली के कई शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। जर्मनी, हंगरी और पोलैंड में भी रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किए गए हैं। ब्रिटेन, जहाँ सामान्यतः इतनी गर्मी नहीं पड़ती, वहाँ भी जून का महीना इतिहास का सबसे गर्म जून माना जा रहा है।
जनजीवन पर गहरा असर
अस्पतालों में लू और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। कई देशों में स्कूलों के समय बदले गए हैं, बुजुर्गों और बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है तथा जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। कुछ क्षेत्रों में रेल सेवाएँ प्रभावित हुई हैं और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।
आखिर इतनी भीषण गर्मी क्यों?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप के ऊपर इस समय एक शक्तिशाली उच्च-दाब प्रणाली (High Pressure System) बनी हुई है, जिसे कई विशेषज्ञ “ओमेगा ब्लॉक” (Omega Block) कहते हैं। यह प्रणाली गर्म हवा को एक ही क्षेत्र में कई दिनों तक रोके रखती है, जिससे तापमान लगातार ऊँचा बना रहता है। इसके साथ ही भूमध्यसागर का असामान्य रूप से गर्म पानी और जलवायु परिवर्तन इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
क्या जलवायु परिवर्तन इसका कारण है?
विश्व मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आज की गर्मी केवल प्राकृतिक मौसम चक्र का परिणाम नहीं है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ऐसी हीटवेव पहले की तुलना में अधिक बार, अधिक तीव्र और अधिक लंबी अवधि तक रहने लगी हैं। विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यूरोपीय देशों से अपील की है कि वे गर्मी को अब असाधारण घटना नहीं, बल्कि नियमित सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती मानकर तैयारी करें।
कब मिलेगी राहत?
यही सबसे बड़ा प्रश्न है। वर्तमान मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार—
मध्य और पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ वर्षा होने से तापमान में कुछ कमी आ सकती है।
स्पेन, दक्षिणी फ्रांस, इटली और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव जुलाई के दूसरे सप्ताह तक बना रहने की आशंका है।
ब्रिटेन में थोड़ी राहत के बाद फिर से एक नया गर्म दौर लौट सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राहत चरणबद्ध मिलेगी; पूरे यूरोप में एक साथ तापमान सामान्य होने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।
भविष्य के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नियंत्रित नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में यूरोप में ऐसी भीषण गर्मी सामान्य घटना बन सकती है। इसलिए अनेक देश शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, भवनों को अधिक तापरोधी बनाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
निष्कर्ष: यूरोप की यह भीषण गर्मी केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक जलवायु का स्पष्ट संकेत है। मौसम विभागों का अनुमान है कि कुछ क्षेत्रों में अगले सप्ताह से आंशिक राहत मिल सकती है, लेकिन दक्षिणी यूरोप के अनेक भागों में जुलाई के मध्य तक गर्मी का असर बना रह सकता है।
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