अयोध्या/नई दिल्ली। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य आभूषणों के कथित गबन का मामला अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। अदालत की अनुमति से आरोपियों से पूछताछ जारी है तथा उनके बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
जांच अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान और बहुमूल्य वस्तुओं की गणना तथा अभिलेखन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का लाभ उठाया गया।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कुछ आरोपियों की घोषित आय और उनकी चल-अचल संपत्तियों में असामान्य अंतर कैसे उत्पन्न हुआ। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी बड़े राजनीतिक या संस्थागत स्तर पर दोष तय नहीं किया है और यह स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
सरकार और जांच एजेंसियों का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि यह कानून का मामला है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी को पूरी स्वतंत्रता के साथ जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। समाचारों के अनुसार जांच का दायरा बढ़ाया गया है और मंदिर से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की भी दोबारा समीक्षा की जा रही है ताकि यदि कहीं कोई कमी या अनियमितता रही हो तो उसका पता लगाया जा सके।
भाजपा का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि किसी भी धार्मिक संस्था की पवित्रता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पार्टी का तर्क है कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो रही है और पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी संस्था या राजनीतिक दल को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस पूरे प्रकरण पर गहरी पीड़ा व्यक्त की है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यदि किसी ने रामभक्तों की श्रद्धा और दान का दुरुपयोग किया है तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। संघ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से भी आग्रह किया है कि वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही संघ ने यह भी अपील की है कि इस घटना का उपयोग समाज में वैमनस्य फैलाने के लिए न किया जाए।
विपक्ष का आक्रामक रुख
कांग्रेस ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए इसकी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता और पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से भी इस विषय पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि भगवान राम किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे देश के हैं और श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए महाराष्ट्र में ‘राम रक्षा’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
विश्व हिंदू परिषद का पक्ष
विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि यदि किसी ने दान में गड़बड़ी की है तो उसे कठोर दंड मिलना चाहिए। परिषद ने साथ ही यह भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने वाले नेताओं से भी उनके आरोपों के समर्थन में साक्ष्य लिए जाने चाहिए, ताकि जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ सके।
आगे क्या?
जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ, वित्तीय दस्तावेजों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि कथित अनियमितता किसी सीमित समूह तक थी या इसका दायरा व्यापक था। अभी तक किसी न्यायालय ने किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।
जनसमाचार की टिप्पणी
राम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। इसलिए यह आवश्यक है कि जांच पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और शीघ्रता से पूरी हो। यदि किसी ने श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए। वहीं किसी भी व्यक्ति या संस्था के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले नहीं निकाला जाना चाहिए। यही कानून के शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है।
(Ram Bhakts,File image)
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