अयोध्या, 6 जुलाई । राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए गए।
बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि बैठक 11 जुलाई को होनी थी, लेकिन इसे कम समय के नोटिस पर 6 जुलाई को ही बुला लिया गया। इस बैठक में न तो चंपत राय और न ही अनिल मिश्रा शामिल हुए।
ट्रस्ट के चेयरमैन महंत नृत्य गोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरिजी महाराज, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि महंत दिनेन्द्र दास और सदस्य कामेश्वर चौपाल की मौजूदगी के कारण इस बैठक को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद और अयोध्या के कलेक्टर (DM) भी एक खास भूमिका में मौजूद थे।
सोमवार को बैठक में ट्रस्टियों ने दो बड़े फैसले लिए। ट्रस्ट से जुड़े शुरुआती फैसले मौजूदा महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने लिए थे। इस्तीफे को बहुमत से स्वीकार कर लिया गया और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय महासचिव बजरंग लाल बागड़ा को सर्वसम्मति से राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया गया। सचिव का पद भी चुना गया।
दान चोरी की घटनाओं के सामने आने के बाद अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे और एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच शुरू की गई। जांच पूरी होते ही दोनों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए।
ट्रस्ट की बैठक के दौरान दान से जुड़ी चोरी के आरोपों पर चर्चा हुई। इसके चलते देश भर में मंदिर की बदनामी हुई, जिससे भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची।
ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने अयोध्या पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराकर चोरी की सूचना दी।
राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से बजरंग लाल बागड़ा को संगठन का नया महासचिव बनाने का फैसला किया। सचिव का पद भी चुना गया। राजस्थान के सीकर इलाके में जन्मे और पले-बढ़े बजरंग लाल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।
भारत सरकार के स्वामित्व और संचालन वाली नवरत्न कंपनी ‘NALCO’ के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) के तौर पर बजरंग लाल बागड़ा ने काम किया है।
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