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सरकार अगले कुछ महीनों में बैंकों को 83 हजार करोड़ रु मुहैया कराएगी

चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार अगले कुछ महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 83000 करोड़ रुपये मुहैया कराएगी।

गुरुवार शाम नई दिल्ली में मीडिया को ब्रीफिंग करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पुनर्पूंजीकरण राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों की उधार क्षमता में वृद्धि करेगा ।

उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खराब ऋण में गिरावट शुरू हो गई है।

गुरुवार को सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए चालू वित्त वर्ष में 65 हजार करोड़ रुपये से एक लाख छह हजार करोड़ रुपये तक बढ़ाए गए बैंक पुनर्पूंजीकरण व्यय के लिए संसद में प्रस्ताव पेश किया।

इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को आने वाले कुछ महीनों में 83,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की नई पूंजी मुहैया कराना संभव हो पाएगा।

ज्यादा नई पूंजी देने के प्रावधान के उद्देश्य ये हैं :

  • पूंजी से जुड़े नियामकीय मानकों को पूरा करना।
  • बेहतर प्रदर्शन करने वाले पीसीए बैंकों को पूंजी मुहैया करना, ताकि वे 9 प्रतिशत के पूंजी-जोखिम भारित परिसम्पत्ति अनुपात (सीआरएआर), 1.875 प्रतिशत के पूंजी संरक्षण बफर और 6 प्रतिशत की शुद्ध एनपीए सीमा को हासिल कर सकें। इससे उन्हें पीसीए के दायरे से बाहर आने में आसानी होगी।
  • पीसीए से जुड़ी कुछ सीमाओं के उल्लंघन की स्थिति में आ चुके गैर-पीसीए बैंकों को सहूलियत देना, ताकि वे उल्लंघन से बच सकें।
  • नियामकीय एवं विकास पूंजी मुहैया करा के विलय कर रहे बैंकों को सुदृढ़ बनाना।

सरकार की ‘4 आर’  अवधारणा के तहत बैंकिंग प्रणाली में व्यापक बदलाव के साथ व्यवस्था को दुरुस्त करने के बाद अब बैंकों को और भी अधिक नई पूंजी उपलब्ध कराने से बैंक वित्तीय दृष्टि से वैश्विक मानकों की तुलना में बेहतर स्थिति में हो जायेंगे। ‘4 आर’  की अवधारणा में रिकग्निशन (पहचान करना), रिसोल्यूशन (समाधान), रिकैपिटलाइजेशन (पुनर्पूंजीकरण) और रिफॉर्म (सुधार) शामिल हैं।

4 आर’  की अवधारणा का प्रमुख असर कुछ इस तरह से हुआ है :  

  • पीएसबी का सकल एनपीए मार्च, 2018 में शिखर पर पहुंचने के बाद घटने लगा है। चालू वित्त वर्ष की प्रथम छमाही के दौरान इसमें 23,860 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है।

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  • पीएसबी के 31 से 90 दिन तक गैर-अदायगी वाले गैर-एनपीए खातों में 5 लगातार तिमाहियों के दौरान 61 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह जून, 2017 के 2.25 लाख करोड़ रुपये से घटकर सितंबर, 2018 में 0.87 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया है। इसकी बदौलत जोखिम वाले ऋणों में उल्लेखनीय कमी आई है।
  • पीएसबी का प्रावधान कवरेज अनुपात (पीसीआर) मार्च, 2015 के 46.04 प्रतिशत से बढ़कर सितम्बर, 2018 में 66.85 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है। इससे नुकसान को खपाने संबंधी बैंकों की क्षमता बढ़ गई है।

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  • चालू वित्त वर्ष की प्रथम छमाही में पीएसबी ने 60,726 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड रिकवरी की है जो पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई रिकवरी राशि की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है।

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