tribal dance

छत्तीसगढ़ में हर साल होगा राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन

छत्तीसगढ़  (Chhattisgarh) में अब हर साल राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव (National tribal dance festival) का आयोजन होगा।  यह आयोजन राज्योत्सव के साथ होगा।

छत्तीसगढ़  के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने कहा कि  राज्योत्सव कुल पांच दिनों को होगा। इसमें पहले दो दिन राज्य के स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं शेष तीन दिन राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य (tribal dance) महोत्सव में पहली बार देश-विदेश के कलाकारों ने एक साथ मंच साझा किया है।

तीन दिवसीय महोत्सव में बड़ी संख्या में आदिवासी (Tribale) कलाकारों ने अपनी कला और संस्कृति को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में छह देशों सहित 25 राज्यों और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों के कलाकार एक साथ जुटे। इस आदिवासी नृत्य (tribal dance) महोत्सव में देश-विदेश की जनजातीय संस्कृतियों को करीब से जानने का लोगों को मौका मिला।

इस आदिवासी नृत्य (tribal dance) महोत्सव ने अनेकता में एकता का संदेश दिया। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल 29 दिसंबर, 2019 की शाम रायपुर के साइंस कालेज मैदान में समापन समारोह को सम्बोधित करते कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का महत्व हर युग में रहा है। त्रेता युग में भगवान राम का ननिहाल यहीं था और उन्होंने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया था। द्वापर में कृष्ण-अर्जुन के यहा आने के प्रमाण है।

बौद्धकाल में सिरपुर में बौद्ध ज्ञान एवं शिक्षा का प्रमुख केन्द्र रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान 1857 में शहीद वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजों के विरूद्ध बिगुल फूका।

आदिवासियों ने जंगल सत्याग्रह कर अंग्रेजों के शोषण नीति के विरूद्ध आवाज उठाई। यहां समाज सुधार के क्षेत्र में बाबा गुरू घासीदास और पंडित सुन्दरलाल शर्मा सहित अनेक महापुरूषों का उल्लेखनीय योगदान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पंद्रह वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान लुप्त हो गई थी। इसे केवल देश के नक्शे पर नक्सल हिंसा की गतिविधियों में स्थान मिलता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बनते ही छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परम्परा और इतिहास, पुरखों के सपनों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करना शुरू किया। किसानों की ऋण माफी और पूरे देश में सबसे ज्यादा 2500 रूपए कीमत में प्रति क्विंटल धान खरीदी की व्यवस्था की। बिना भेदभाव के हर परिवार को 35 किलो चावल सहित अनेक निर्णय लिए।

उन्होंने कहा कि हमारे सियान, हमारे पुरखों ने एक समृद्ध छत्तीसगढ़, मजबूत छत्तीसगढ़ की परिकल्पना की थी।  यहां करमा, गौर नृत्य, पंथी, सुआ नृत्य का अपना महत्व है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन से छत्तीसगढ़ का नाम देश में ही नहीं समुद्र पार विदेशों में भी गया है।

 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पहली बार आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य (tribal dance)महोत्सव में 25 राज्यों, 3 केन्द्र शासित प्रदेशों सहित बांग्लादेश, थाईलैण्ड, श्रीलंका, युगांडा, बेलारूस और मालदीप के 1800 कलाकारों ने यहां 125 से अधिक मनमोहक प्रस्तुतियां दी।

आदिवासी कला और संस्कृति का अनूठा संगम यहां तीन दिनों तक रहा। यहां आए कलाकारों ने एक दूसरे की संस्कृति का खूब आनंद लिया।

आदिवासी नृत्य (tribal dance)महोत्सव के अंतिम दिन उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, गुजरात सहित छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने अप्रितम नृत्य के हुनर का प्रदर्शन किया। वहीं शिल्पग्राम, छत्तीसगढ़ी व्यंजन और विभागीय स्टॉल कौतूहल का केंद्र बने रहे।