उपराष्ट्रपति ने ‘ज्ञानी अर्थ’ एआई स्टैक का शुभारंभ किया
नई दिल्ली, 28 अगस्त। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें हमेशा उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए; हमें सृजन करना होगा, ताकि दूसरे उसका उपयोग कर सकें।’’
उपराष्ट्रपति ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में ‘ज्ञानी अर्थ’ का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। यह ज्ञानी एआई द्वारा विकसित एक स्वतंत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्टैक है, जिसमें इवोन 3.3 बड़ा भाषा मॉडल और प्लेक्सस प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इवोन 3.3 को बड़ा भाषा मॉडल बताया गया है, जबकि प्लेक्सस एआई की क्षमताओं को वास्तविक दुनिया के कार्यों और संस्थानों से जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म है।
इस अवसर पर राधाकृष्णन ने कहा कि इवोन 3.3 और प्लेक्सस का संयोजन भारत के बढ़ते प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने के साथ-साथ उसका निर्माण करने में भी सक्षम हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि टाइपराइटर के दौर से लेकर व्यक्तिगत कंप्यूटर और अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा बड़े भाषा मॉडल के युग तक प्रौद्योगिकी में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटरों के कारण रोजगार खत्म होने की आशंकाओं के विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने भारत और विदेशों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए।
उन्होंने विश्वास जताया कि एआई भी रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करेगा तथा भारत की आर्थिक प्रगति को नई गति देगा।
राधाकृष्णन ने एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इंडियाएआई मिशन और एआई उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहल देश में तकनीकी बदलाव को गति दे रही हैं।
संसद में एआई के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल संसद पोर्टल के माध्यम से संसदीय बहसों और दस्तावेजों को कई भारतीय भाषाओं में पढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हाल में समाप्त हुए सत्र के दौरान आठ भाषाओं में एआई आधारित अनुवाद सेवा शुरू की गई और इसे जल्द ही सभी अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा।
उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें हमेशा उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए; हमें सृजन करना होगा, ताकि दूसरे उसका उपयोग कर सकें।’’
उन्होंने भारत की तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए संप्रभु एआई क्षमताएं विकसित करने की जरूरत पर भी बल दिया। सेमीकंडक्टर विनिर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में बहुत पहले आगे बढ़ सकता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इसे नई गति मिली है।
राधाकृष्णन ने कहा कि तकनीकी क्षमता ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में देश की यात्रा का महत्वपूर्ण स्तंभ होगी। उन्होंने ‘ज्ञानी अर्थ’ को तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत की व्यापक यात्रा का हिस्सा बताया।
उन्होंने ज्ञानी एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गणेश गोपालन और सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी अनंत नागराज को इस पहल के शुभारंभ पर बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह एक मजबूत, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देगा।
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