नई दिल्ली, 24 जुलाई। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस को कहा था कि विपक्ष नीट पेपरलीक जैसे गंभीर विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा करें, ताकि करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय का स्थायी समाधान निकले।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार संसद में विस्तृत चर्चा कर प्रभावी नीति बनाने और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए तैयार है।
जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि विद्यार्थियों की जो मांगें हैं और जिस विषय पर उन्होंने पेपर लीक का मुद्दा उठाया है, सबसे पहले उनका आग्रह है कि इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और इससे राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास भी उचित नहीं है। यह एक गंभीर समस्या है, जिस पर गंभीरता के साथ चर्चा किए जाने की आवश्यकता है। बुधवार 22 जुलाई शाम 4 बजे भारत की संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी ने अपने प्रस्तुतीकरण में लगभग 150 पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख किया। यह जांच का विषय है और सरकार एक जिम्मेदार सरकार है। इसलिए प्रत्येक मामले की जांच कराई जाएगी तथा जांच के आधार पर जनता और देश के सामने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर की बात करें तो सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की परीक्षा में पेपर लीक हुआ था, जहाँ कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) की सरकार है। इसी प्रकार हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की परीक्षा में पेपर लीक हुआ, जहाँ कांग्रेस की सरकार है। झारखंड में जे.ए.सी. में हिंदी और विज्ञान के पेपर लीक हुए, जहाँ कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है। तेलंगाना में इंटरमीडिएट की भाषा विषय की परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जहाँ कांग्रेस और सीपीआई समर्थित सरकार है। तेलंगाना में एसएससी की भाषा विषय की परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ, जहाँ भी कांग्रेस और सीपीआई समर्थित सरकार है। तमिलनाडु में बी.एड. पाठ्यक्रम की परीक्षा के दौरान तमिलनाडु टीचर्स एजुकेशन यूनिवर्सिटी बोर्ड में भी पेपर लीक हुआ। वहाँ भी उस समय विपक्ष की सरकार थी।
नड्डा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, जहाँ उस समय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकार थी। पंजाब में पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड की ग्रुप-बी परीक्षा में भी पेपर लीक हुआ और अनियमितताएँ सामने आईं। इसी प्रकार केरल में राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) की 26 परीक्षाओं में अनियमितताएँ हुईं। कर्नाटक में, जहाँ कांग्रेस की सरकार है, वहाँ भी प्रिपरेटरी बोर्ड परीक्षा और पीयूसी की परीक्षा के पेपर लीक हुए। हमने फिलहाल केवल कुछ उदाहरणों का उल्लेख किया है, जबकि इसकी सूची काफी लंबी है और इस पर चर्चा के दौरान विस्तार से बात की जा सकती है।
नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी इतने चयनात्मक क्यों हैं? राहुल गांधी ने यूपीए तथा यूपीए समर्थित सरकारों, जिन्हें वह इंडी गठबंधन या इंडी अलायंस कहते हैं, के कार्यकाल में हुई ऐसी घटनाओं का उल्लेख क्यों नहीं किया और स्वयं को उनसे अलग क्यों रखा?
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह स्पष्ट करता है कि राहुल गांधी का उद्देश्य छात्रों का हित नहीं है। उनका उद्देश्य शिक्षा का विस्तार, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार या विद्यार्थियों को न्याय दिलाना नहीं है। राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों और उनकी मांगों का राजनीतिक लाभ लेने तथा उन पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का प्रयास कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यह समय हमारी सरकार, आपकी सरकार या उनकी सरकार के आधार पर इन घटनाओं को विभाजित करने का नहीं है। यह एक गंभीर विषय है। जैसे हम पहले भी कुछ उदाहरण दे चुके हैं, वैसे ही ऐसी घटनाओं की सूची काफी लंबी है, जिसमें यूपीए की सरकारों के दौरान भी पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं। आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और इसके लिए सबसे उपयुक्त मंच संसद है। सरकार इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, ताकि पेपर लीक के कारणों, इसमें शामिल लोगों और इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर गहनता से विचार किया जा सके।
नड्डा ने कहा कि जब भी किसी पेपर लीक का मामला सरकार के संज्ञान में आया है, उसे किस प्रकार संबोधित किया गया है और अन्य सरकारों को भी ऐसे मामलों से किस प्रकार निपटना चाहिए, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। ऐसे कौन-से बिंदु हैं, जिन पर गहराई से चिंतन कर समाधान निकाला जा सकता है, ताकि करोड़ों छात्रों के साथ अन्याय न हो। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में, इस विषय को अत्यंत गंभीरता से ले रहे हैं। इसी कारण सरकार चाहती है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा हो।
शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कशन हो या लॉन्ग ड्यूरेशन डिस्कशन, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी जितना समय तय करे, सरकार उसके लिए तैयार है। राज्यसभा में सदन के नेता के रूप में उन्होंने हमेशा यह माना है कि विपक्ष जितने घंटे चर्चा चाहता है, सरकार उसके लिए तैयार है। विपक्ष को इस विषय पर गोलपोस्ट नहीं बदलना चाहिए। यह आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस समस्या का किस प्रकार समाधान किया जा सकता है, इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संसद सबसे उपयुक्त मंच है, जहाँ इस विषय पर गहन चिंतन किया जा सकता है। चर्चा की अवधि विपक्ष तय करे और उसमें प्रत्येक पहलू पर विस्तार से चर्चा हो, ताकि एक ठोस नीति बनाई जा सके। बच्चे न किसी एक दल के हैं और न किसी एक सरकार के, बल्कि वे देश का भविष्य हैं। देश के भविष्य की चिंता करना सरकार और विपक्ष, दोनों की समान जिम्मेदारी है। इसलिए विपक्ष को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और सभी को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। आज हमारी ओर से इतना ही कहना है। हम पुनः आश्वस्त करते हैं कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार एक जिम्मेदार और संवेदनशील सरकार है, जो सदैव इस पक्ष में रही है कि सभी विषयों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और सरकार इस चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।



