नई दिल्ली, 15 अगस्त। टीवी दर्शकों के लिए विज्ञापनों से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने वाला है। सरकार ने टीवी चैनलों के लिए विज्ञापन दिखाने की तय 12 मिनट की सीमा को खत्म करने का फैसला किया है।
इस फैसले का सीधा असर टीवी दर्शकों पर पड़ने की संभावना है। चैनलों को अब विज्ञापनों पर पहले से लागू 12 मिनट की सीमा का पालन करने की ज़रूरत नहीं होगी, जिससे कुछ चैनलों पर विज्ञापन का समय बढ़ सकता है।
इसका मतलब है कि टीवी चैनल अब अपनी कमर्शियल ज़रूरतों के आधार पर विज्ञापन का समय तय कर सकेंगे।
विज्ञापन की समय सीमा मूल रूप से 2006 में ‘केबल टेलीविज़न नेटवर्क नियम, 1994’ के तहत लागू की गई थी। उस समय देश में टीवी चैनलों की संख्या बहुत कम थी और केबल टीवी मुख्य रूप से एनालॉग तकनीक पर चलता था। सीमित प्रसारण क्षमता के कारण दर्शकों के पास चैनल के कम विकल्प थे।
हालाँकि, पिछले दो दशकों में टीवी इंडस्ट्री का परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है। जहाँ 2006 में देश में लगभग 62 टीवी चैनल थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 900 से ज़्यादा हो गई है। केबल टीवी का डिजिटाइज़ेशन हो चुका है और DTH, डिजिटल केबल, HITS और IPTV जैसे प्लेटफॉर्म ने टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को काफी बदल दिया है।
आज दर्शकों के पास सैकड़ों चैनलों का विकल्प है। ज़्यादातर डिजिटल प्लेटफॉर्म 300 से 500 या उससे भी ज़्यादा चैनल देते हैं। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से टीवी प्रसारण क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा पैदा हुई है, जिससे दर्शकों को अपनी पसंद के चैनल चुनने के ज़्यादा मौके मिले हैं।
12 मिनट की सीमा क्यों हटाई गई?
सरकार के अनुसार, टीवी इंडस्ट्री काफी हद तक विज्ञापन से होने वाली कमाई पर निर्भर करती है। यह बात न केवल फ्री-टू-एयर चैनलों पर लागू होती है, बल्कि पे-चैनलों पर भी लागू होती है—यानी वे चैनल जिनके लिए दर्शक सब्सक्रिप्शन फीस देते हैं।
इसके अलावा, डिजिटल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए विज्ञापन के समय पर ऐसी कोई एकसमान सीमा नहीं है। सरकार का मानना है कि पिछली व्यवस्था से पारंपरिक टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया के बीच प्रतिस्पर्धा के लिए समान अवसर नहीं मिल रहे थे।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, अब टेलीविज़न क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा है। इसलिए, सरकार ने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (आसानी से व्यापार करने की सुविधा) को प्रोत्साहित करने के मकसद से विज्ञापन के समय की सीमा को हटाने का फ़ैसला किया है।
इसका दर्शकों पर क्या असर होगा?
इस फ़ैसले का सबसे सीधा असर टीवी दर्शकों पर पड़ने की संभावना है। अब चैनलों को विज्ञापनों के लिए पहले से तय 12 मिनट की सीमा का पालन करने की ज़रूरत नहीं होगी। नतीजतन, कुछ चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि बढ़ सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने टीवी विज्ञापनों से जुड़े सभी नियम खत्म कर दिए हैं। विज्ञापन की सामग्री और प्रसारण से जुड़े अन्य लागू नियम और कानून पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
यह फ़ैसला उस तारीख से लागू होगा जब ‘केबल टेलीविज़न नेटवर्क नियम, 1994’ में संशोधन करने वाली अधिसूचना (नोटिफिकेशन) आधिकारिक राजपत्र (ऑफ़िशियल गज़ट) में प्रकाशित होगी।
कुल मिलाकर, सरकार का तर्क है कि 2006 में बनाए गए नियम उस समय की परिस्थितियों के हिसाब से तो ठीक थे, लेकिन तब से टेलीविज़न इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी, चैनलों की संख्या और प्रतिस्पर्धा के माहौल में काफ़ी बदलाव आए हैं। इसलिए, विज्ञापन के समय की सीमा से जुड़े पुराने नियम को हटाना ज़रूरी हो गया था।
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