Jharkhand student protest deadlocked for 18th day, six students on hunger strike

झारखंड छात्र आंदोलन, 18वें दिन भी गतिरोध, छह छात्र आमरण अनशन पर

रांची, 11 अगस्त। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र और अभ्यर्थी आंदोलन आज 18वें दिन भी जारी है।

सोमवार को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया, जबकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विधानसभा मार्च किया। मार्च के दौरान पुलिस ने 110 ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों और सरकार के बीच बातचीत का छठा दौर भी बिना किसी निर्णायक समझौते के समाप्त हो चुका है।

सबसे गंभीर स्थिति आंदोलन के आमरण अनशन को लेकर है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और इनमें से दो को तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी नौ दिन के अनशन के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती हुए।

मंगलवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देवेंद्र नाथ महतो से कहा, “देवेंद्र भाई, आपके साहस और जज़्बे को हमारा सलाम!”

“आप झारखंड के युवाओं की आवाज़ और प्रेरणा हैं। इस लड़ाई में हम पूरी ताकत के साथ आपके साथ खड़े हैं। देश को आप जैसे बहादुर और मज़बूत इरादों वाले युवाओं की ज़रूरत है।

हम आपके जल्द ठीक होने की कामना करते हैं। देश को आपकी ज़रूरत है।”

सोमवार को हजारों छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार किए, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने कई लोगों के घायल होने का दावा किया, जबकि रांची पुलिस के अनुसार उसके 14 जवान घायल हुए।

इस कार्रवाई के बाद आंदोलन का मुद्दा परीक्षा में कथित अनियमितताओं से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ व्यवहार का भी मुद्दा बन गया है।

छठे दौर की बातचीत भी किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी है। राहुल गांधी ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की निंदा की और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का जवाब हिंसा से नहीं दिया जाना चाहिए। इसके जवाब में भाजपा ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया, क्योंकि कांग्रेस झारखंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का हिस्सा है।

सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया जा रहा है।

JMM सांसद महुआ माजी ने कहा कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं और शेष मुद्दों में JSSC-CGL ऐसा मामला है जो अदालत की निगरानी में है। उनका तर्क है कि परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी है।

जिन मांगों को सरकार ने नहीं माना है, उनमें वही मुद्दे शामिल हैं जिन्हें वे आंदोलन का मूल कारण मानते हैं—विशेषकर JSSC-CGL को लेकर निर्णय और स्वतंत्र CBI जांच।

इसलिए दोनों पक्षों के बीच विवाद अब केवल मांगों की संख्या का नहीं, बल्कि कौन-सी मांग निर्णायक है और किस पर अंतिम निर्णय होना चाहिए, इसका है।

सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया जा रहा है। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को लाठी के बजाय छात्रों की मांगों का जवाब देना चाहिए।

फिर भी आंदोलन का समाधान संभव है।

इसके लिए तीन स्तरों पर पहल की आवश्यकता होगी—

पहला, सरकार और छात्रों के बीच तत्काल फिर से सीधा संवाद हो।

दूसरा, JSSC-CGL और दूसरी विवादित परीक्षाओं को लेकर ऐसी जांच व्यवस्था बनाई जाए जिस पर दोनों पक्षों को विश्वास हो।

तीसरा, आमरण अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर तत्काल कदम उठाया जाए और आंदोलनकारियों को ठोस लिखित आश्वासन दिया जाए।

यदि सरकार स्वतंत्र जांच के स्वरूप पर कोई ऐसा रास्ता निकालती है जिसे छात्र स्वीकार कर लें और विवादित परीक्षाओं पर स्पष्ट समयबद्ध निर्णय सामने आता है, तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है।

लेकिन यदि सरकार अपने 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार करने के दावे पर कायम रहती है और छात्र CBI जांच तथा JSSC-CGL को लेकर अपने रुख से पीछे नहीं हटते, तो गतिरोध आगे भी जारी रह सकता है।

छात्र आंदोलन का असर आज झारखंड विधानसभा पर भी पड़ा। छात्रों पर सोमवार की पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर भाजपा विधायकों ने सदन में विरोध किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

अंततः विधानसभा को निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि CID जांच जारी है और सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।

इस घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को प्रशासनिक विवाद से निकालकर सीधे राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल झारखंड में आंदोलन जारी है, छह छात्र आमरण अनशन पर हैं, दो अस्पताल में हैं, राजनीतिक टकराव बढ़ा है और सरकार तथा छात्रों के बीच समाधान का रास्ता अभी खुला होने के बावजूद सहमति दूर दिखाई दे रही है।