विज्ञान और प्रकृति का रिश्ता हमेशा से ही हैरानी भरा रहा है। लेकिन ज़रा सोचिए: क्या कोई छोटा सा जीव—महज कुछ मिलीमीटर का बीटल या कीड़ा—1,500 किलोग्राम वज़न वाली कार के पहिए के नीचे आने के बाद भी आराम से रेंगते हुए आगे बढ़ सकता है?
आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि भविष्य के फाइटर जेट, बुलेटप्रूफ गाड़ियां और अभेद्य सुरक्षा कवच प्रयोगशालाओं के बजाय प्रकृति के एक छोटे से जीव से प्रेरणा लेकर बनाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक इस समय यानि 2026 में इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। चीन, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के वैज्ञानिक इस समय महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं।
यह सुनने में किसी साइंस-फ़िक्शन फ़िल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह सच है। प्रकृति ने उत्तरी अमेरिका के जंगलों में एक ऐसी प्रजाति को जन्म दिया है जिसे वैज्ञानिक ‘डायबोलिकल आयरनक्लैड बीटल’ (Diabolical Ironclad Beetle) के नाम से जानते हैं।
इसका वैज्ञानिक नाम Phloeodes diabolicus है। आज, यह छोटा सा बीटल दुनिया भर के एयरोस्पेस इंजीनियरों, मिलिट्री वैज्ञानिकों और मटीरियल एक्सपर्ट्स के लिए स्टडी का एक अहम विषय है।
‘डायबोलिकल आयरनक्लैड बीटल’ की 1851 में पहचानी गई थी। इस प्रजाति के ‘सुपर आर्मर’ (मज़बूत कवच) का राज़ 2020 में खुला। अमेरिकी कीट-वैज्ञानिक (entomologist) जॉन लॉरेंस लेकॉन्टे ने 1851 में इस अनोखे कीड़े को दुनिया के सामने पेश किया था। हालाँकि, दशकों तक इसे सिर्फ़ एक सख़्त खोल (shell) वाले बीटल के तौर पर ही देखा जाता रहा।
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, इरविन (UCI) के डॉ. जीसस रिवेरा और प्रोफ़ेसर डेविड किसैलस ने पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर पाब्लो ज़वात्तिएरी के साथ मिलकर आधुनिक X-रे CT स्कैन और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल करके इस बीटल के शरीर का विश्लेषण किया, जिससे एक बड़ी कामयाबी मिली।
जब 2020 में दुनिया की मशहूर साइंस मैगज़ीन ‘नेचर’ (Nature) में उनकी स्टडी रिपोर्ट छपी, तो दुनिया भर के डिफेंस और स्पेस साइंटिस्ट हैरान रह गए।
इसके कवच के पीछे का वैज्ञानिक राज़ क्या है?
कीट-वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बीटल अपने शरीर के वज़न से 39,000 गुना ज़्यादा दबाव झेल सकता है। इसे आसान भाषा में समझें तो, यह 70 किलोग्राम वज़न वाले किसी व्यक्ति के ऊपर लगभग 27 लाख किलोग्राम वज़न पड़ने जैसा है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इसका कवच दो ज़रूरी इंजीनियरिंग सिद्धांतों पर काम करता है:
- जिगसॉ इंटरलॉकिंग (Jigsaw Interlocking): पंखों के ऊपरी खोल (एलाइट्रा/elytra) जिगसॉ पज़ल के हिस्सों की तरह आपस में जुड़े होते हैं। ज़्यादा दबाव पड़ने पर यह जोड़ अचानक टूटता नहीं है; बल्कि यह ऊर्जा को पूरे शरीर में फैला देता है।
- डीलेमिनेशन (Delamination): इसका खोल काइटिन (chitin) और प्रोटीन की कई परतों से बना होता है। जब इन पर दबाव पड़ता है, तो ये परतें एक-दूसरे के ऊपर थोड़ी खिसकती हैं, जिससे झटके का असर कम हो जाता है।
Phloeodes diabolicus (डायबोलिकल आयरनक्लैड बीटल) डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में क्रांति लाने के लिए तैयार है।
अभी, अमेरिका, जापान और यूरोप के कई मिलिट्री और साइंटिफिक संस्थान इस बीटल के बायोलॉजिकल स्ट्रक्चर (बायोमिमिक्री) की नकल करके बुलेटप्रूफ जैकेट, एयरक्राफ्ट जॉइंट्स और बख्तरबंद गाड़ियों की सुरक्षा के लिए नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।
हमारी बुलेटप्रूफ जैकेट हल्की और अभेद्य होती हैं, जबकि पारंपरिक जैकेट भारी होती हैं। बीटल के ‘डिलेमिनेशन’ कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल करके, रिसर्चर ऐसी हल्की जैकेट और हेलमेट बना रहे हैं जो आसानी से गोली के असर को झेल सकते हैं।
सुरक्षित एयरक्राफ्ट जॉइंट्स: एयरोस्पेस में, दो अलग-अलग मटीरियल (जैसे, कार्बन फाइबर और मेटल) को जोड़ने में कभी-कभी रिवेट्स या बोल्ट का इस्तेमाल होता है जो समय के साथ ढीले हो सकते हैं। बीटल के ‘जिगसॉ डिज़ाइन’ से प्रेरित होकर, ऐसे जॉइंट्स विकसित किए जा रहे हैं जो बिना किसी अतिरिक्त मेटल फास्टनिंग के झटके और कंपन को झेल सकते हैं।
सैनिकों को ज़मीन पर होने वाले धमाकों (जैसे IED) से बचाने के लिए टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों में धमाका-रोधी अंडरकैरेज लगाए जा रहे हैं।
इंसान उन इंजीनियरिंग चमत्कारों को बेहतर ढंग से समझने के लिए तेज़ी से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें प्रकृति ने लाखों सालों के विकास के दौरान महारत हासिल की है।
किन देशों में हो रहा है अनुसंधान और निर्माण?
डायबोलिकल आयरनक्लैड बीटल (Phloeodes diabolicus) की असाधारण मजबूती अब दुनिया के कई देशों में वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बनी हुई है।
अमेरिका से शुरू हुई इस जैव–प्रेरित शोधधारा अब चीन, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों तक पहुंच चुकी है।
वैज्ञानिक इसके शरीर के कठोर बाहरी कवच को ही नहीं, बल्कि दोनों पंख-कवचों को जोड़ने वाली जिगसॉ-पजल जैसी इंटरलॉकिंग संरचना को समझकर उसके कृत्रिम रूप तैयार कर रहे हैं। 2026 में प्रकाशित शोधों में इस संरचना पर आधारित 3D-प्रिंटेड मेटामटेरियल, लैटिस और इंटरलॉकिंग यूनिट विकसित कर उनके दबाव, ऊर्जा-अवशोषण और टूटने से बचने की क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है।
चीन के शोधकर्ताओं ने बीटल की संरचना से प्रेरित हनीकॉम्ब मेटामटेरियल और 3D-प्रिंटेड संरचनाओं पर काम आगे बढ़ाया है, जिनका संभावित उपयोग हल्की लेकिन अधिक मजबूत इंजीनियरिंग संरचनाओं में किया जा सकता है।
चीन में इस शोध का एक खास व्यावहारिक पहलू सामने आया है। जुलाई 2026 में जिलिन यूनिवर्सिटी से संबंधित एक पेटेंट प्रकाशित हुआ, जिसमें आयरनक्लैड बीटल के पंख-कवच की इंटरलॉकिंग संरचना से प्रेरित बायोमिमेटिक बैलिस्टिक पैनल का डिजाइन प्रस्तुत किया गया है। इसमें बीटल की संरचना को दूसरे जैविक कवच से प्रेरित डिजाइन के साथ मिलाकर तीन-स्तरीय बुलेटप्रूफ इन्सर्ट प्लेट तैयार करने की अवधारणा दी गई है।
दूसरी ओर, चीन में बीटल से प्रेरित स्नैप-फिट मेटामटेरियल को 3D प्रिंट करके उसके compression और energy-absorption गुणों का परीक्षण किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बीटल की प्राकृतिक संरचना अब केवल प्रयोगशाला में उसकी मजबूती समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षात्मक प्लेट, हल्की संरचनाओं और ऊर्जा–अवशोषक इंजीनियरिंग सामग्री के डिजाइन तक पहुंच रही है।
एयरोस्पेस क्षेत्र में भी इसके उपयोग की दिशा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में आयरनक्लैड बीटल के पंख-कवच की इंटरलॉकिंग संरचना से प्रेरित suture interface को क्षतिग्रस्त composite laminates की मरम्मत में इस्तेमाल किया गया।
परीक्षणों में इस जैव-प्रेरित डिजाइन ने पारंपरिक step-repair की तुलना में tensile peak force में लगभग 30.47 प्रतिशत और bending में 8.65 प्रतिशत सुधार दिखाया। इसका संभावित महत्व विमान के हल्के composite components और उनकी repair technology में है, जहां वजन कम रखते हुए जोड़ को मजबूत और damage-tolerant बनाना बड़ी चुनौती है।
इसी वर्ष दक्षिण कोरिया से जुड़े शोधकर्ताओं ने भी बीटल की interdigitated संरचना से प्रेरित flexible architecture विकसित किया, जिसमें stress को अधिक समान रूप से फैलाने और स्थानीय तनाव को कम करने की क्षमता परीक्षणों में सामने आई। इस तरह प्रकृति का यह छोटा-सा जीव भविष्य के विमान, सुरक्षात्मक कवच, ऊर्जा–अवशोषक संरचनाओं और हल्के लेकिन अत्यधिक मजबूत engineering materials के लिए एक महत्वपूर्ण डिजाइन-मॉडल बनता जा रहा है। (jansamachar desk)
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