नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने ऐसे ‘जाम’ हो चुके सिस्टम को कुछ समय के लिए फिर से बहने योग्य बनाने का तरीका खोज लिया है, जिसकी संरचना कांच जैसी होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, तापमान में अचानक बदलाव यानी थर्मल शॉक देकर ऐसे सिस्टम में मौजूद ‘मेमोरी इम्प्रिंट्स’ को मिटाया जा सकता है। इस खोज के भविष्य में दवा पहुंचाने (ड्रग डिलीवरी) जैसी तकनीकों में महत्वपूर्ण उपयोग हो सकते हैं।
कांच जैसे पदार्थों की एक खासियत यह है कि उनमें ठोस पदार्थों जैसी यांत्रिक विशेषताएं होती हैं, लेकिन उनकी आंतरिक संरचना तरल पदार्थों जैसी अव्यवस्थित रहती है। ऐसी संरचनाओं में उनके पिछले तापमान या परिस्थितियों की ‘याद’ भी बनी रह सकती है। वैज्ञानिक लंबे समय से इस स्मृति को मिटाने और ऐसी सामग्री को नियंत्रित तरीके से अधिक गतिशील बनाने के उपाय खोज रहे हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के शोधकर्ताओं ने इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। शोधार्थी सोनाली कवाले के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में ऐसे नरम कणों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें बहुत अधिक मात्रा में एक साथ भरने पर वे कांच जैसे कठोर और ‘जाम’ व्यवहार करने लगते हैं। शोधपत्र की सह-लेखिका रंजिनी बंद्योपाध्याय हैं।
माइक्रोजेल कणों से किया प्रयोग
शोध में इस्तेमाल किए गए नरम कण माइक्रोजेल से बने थे। माइक्रोजेल ऐसे पदार्थ हैं जो अपने वजन की तुलना में लगभग 300 से 500 गुना अधिक पानी सोख सकते हैं। इसी गुण के कारण इनका इस्तेमाल डायपर और सैनिटरी नैपकिन जैसे उत्पादों में किया जाता है। तापमान के प्रति संवेदनशील होने के कारण इनका उपयोग दवा पहुंचाने वाली प्रणालियों में भी किया जाता है।
शोधकर्ताओं ने पहले माइक्रोजेल कण तैयार किए और उन्हें बारीक पाउडर में बदला। इसके बाद पाउडर को पानी में मिलाकर सस्पेंशन बनाया गया। इस सस्पेंशन को 24 घंटे तक हिलाया गया और 15 मिनट तक सोनिकेशन किया गया। बाद में इसे 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा गया, जहां यह लंबे समय तक उपयोग योग्य बना रहा।
प्रयोगों के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि सस्पेंशन को गर्म करके 20 डिग्री सेल्सियस तक लाने और फिर ठंडा करके उसी तापमान तक पहुंचाने का रास्ता एक जैसा नहीं था। अर्थात सिस्टम का व्यवहार केवल शुरुआती और अंतिम तापमान पर निर्भर नहीं था, बल्कि इस बात पर भी निर्भर था कि तापमान परिवर्तन किस रास्ते से हुआ। यही अंतर सिस्टम में उसकी पिछली अवस्था की ‘स्मृति’ के रूप में बना रहता है।
अचानक तापमान बढ़ाने से टूटा जाम
शोधकर्ताओं ने जब तापमान बढ़ने की गति को अचानक बढ़ाया और सिस्टम को एक तरह का थर्मल शॉक दिया, तो कणों ने अपने आपको दोबारा व्यवस्थित करना शुरू कर दिया। इससे जाम जैसी अवस्था कुछ समय के लिए तरल जैसी गतिशील अवस्था में आ गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया से सिस्टम में गर्म होने और ठंडा होने के दौरान बनी अलग-अलग ‘राहों’ की स्मृति मिटाई जा सकती है। इससे उसकी असमान शिथिलता कम होती है और संरचना को अधिक नियंत्रित ढंग से अपनी अपेक्षाकृत स्थिर अवस्था की ओर बढ़ाया जा सकता है। इसे स्ट्रक्चरल रिकवरी कहा जाता है।
दवा पहुंचाने में हो सकता है उपयोग
इस खोज का एक महत्वपूर्ण संभावित उपयोग ड्रग डिलीवरी में हो सकता है। माइक्रोजेल आधारित प्रणालियों में तापमान के बदलाव का इस्तेमाल दवा को नियंत्रित तरीके से छोड़ने के लिए किया जाता है।
ठंडे तापमान में माइक्रोजेल दवा को अपने भीतर समाहित कर फूल सकते हैं। तापमान बढ़ने पर वे सिकुड़ते हैं और अपने भीतर मौजूद दवा को बाहर छोड़ सकते हैं। कुछ प्रणालियों में शरीर के तापमान के आसपास या उससे थोड़ा अधिक तापमान पर यह प्रक्रिया सक्रिय की जा सकती है। इससे दवा को शरीर के किसी लक्षित हिस्से, जैसे ट्यूमर, तक नियंत्रित तरीके से पहुंचाने में मदद मिल सकती है और संभावित रूप से दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी प्रणालियों की संरचना और उनके व्यवहार पर तापमान में अचानक किए गए बदलाव के प्रभाव को समझना अधिक प्रभावी और नियंत्रित ड्रग डिलीवरी तकनीकों के विकास में उपयोगी हो सकता है।
इस अध्ययन के निष्कर्ष जर्नल ऑफ कोलॉइड एंड इंटरफेस साइंस में प्रकाशित हुए हैं। शोध दल अब यह अध्ययन करने की योजना बना रहा है कि ऐसे फंसे हुए यानी ‘जाम’ सिस्टम पर मैकेनिकल शॉक का क्या प्रभाव पड़ता है और वह थर्मल शॉक से किस तरह अलग है।
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