Lakhs of students and youth staged an unprecedented protest near Parliament in Delhi

दिल्ली में लाखों छात्रों और युवाओं का संसद मार्ग पर अभूतपूर्व प्रदर्शन

नई दिल्ली, 20 जुलाई (जनसमाचार)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान राजधानी का मध्य क्षेत्र दिनभर आंदोलन, प्रदर्शन, लाठीचार्ज, आंसूगैस और अनेक युवाओं के घायल होने  की ख़बरों के साथ ही सुरक्षा बंदोबस्त और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा।

जानकारों का कहना है की इसतरह का आंदोलन सालों बाद देखा गया। छात्रों के माता&पिताओं का कहना हैं की शिक्षा व्यवस्था में सुधर किया जाना चाहिए तभी देश तरक्की कर सकेगा।  आंदोलन में 77  साल की बुजुर्ग महिलाएं और पिता भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए।

शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लाखों की तादात में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जंतर-मंतर तथा संसद मार्ग क्षेत्र में जुटे।

दिल्ली पुलिस ने संसद भवन और उससे लगे पूरे वीआईपी क्षेत्र में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की। संसद मार्ग, विजय चौक, जनपथ, अशोक रोड और आसपास के कई मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए। यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर वाहनों की जांच की गई, जिससे दिनभर लंबा जाम लगा रहा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर लोगों से मध्य दिल्ली की यात्रा टालने की अपील की थी। एहतियात के तौर पर कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास भी अस्थायी रूप से सीमित किया गया।

सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्र और युवा समूहों में जंतर-मंतर पहुंचने लगे। आयोजकों ने इसे केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा जनांदोलन बताया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान की प्रतियां, तख्तियां और विभिन्न मांगों वाले पोस्टर दिखाई दिए। पूरे क्षेत्र में शिक्षा सुधार और जवाबदेही से जुड़े नारे लगातार सुनाई देते रहे।

हालांकि दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि संसद तक किसी मार्च की अनुमति नहीं दी गई है और नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा प्रभावी है। पुलिस ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि बिना अनुमति संसद की ओर बढ़ने की कोशिश न करें।

इसके बावजूद दोपहर के समय प्रदर्शनकारियों के कई समूह संसद मार्ग की ओर बढ़ने लगे। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स सहित कुछ मीडिया संस्थानों ने बताया कि भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए तथा कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया। वहीं दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कई वीडियो और व्यापक हिरासत के दावों का खंडन करते हुए कहा कि अनेक दावे भ्रामक हैं तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

आंदोलन की पृष्ठभूमि पिछले कई महीनों से चल रहे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और युवाओं में बढ़ती असंतुष्टि से जुड़ी है। सीजेपी ने इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और प्रभावित छात्रों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

आंदोलन को नई गति तब मिली जब पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन शुरू किया। सीजेपी नेताओं का आरोप है कि वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाया गया, जिससे छात्रों में और अधिक रोष फैल गया। इस मुद्दे ने आंदोलन को छात्र संगठनों की सीमा से निकालकर व्यापक नागरिक आंदोलन का रूप देना शुरू कर दिया।

राजनीतिक दृष्टि से भी सोमवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं मनीष सिसोदिया, आतिशी और संजय सिंह प्रदर्शन स्थल पहुंचे। समाचारों के अनुसार वे पुलिस बैरिकेड पार कर प्रदर्शनकारियों तक पहुंचे और छात्रों की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इससे आंदोलन को विपक्षी दलों का खुला समर्थन भी मिलने लगा।

दिन के दौरान फिल्म जगत की वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता प्रकाशराज भी आंदोलन स्थल पहुंचे । उन्होंने कहा कि छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए और संवाद लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है। शबाना के अनुसार जावेद अख्तर ने पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छात्रों से बातचीत शुरू करने का आग्रह किया था।

उधर केंद्र सरकार की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने आंदोलन के प्रतिनिधियों की मांगों को सरकार के समक्ष रखने की पहल की। आंदोलन के नेताओं ने इसे सकारात्मक संकेत बताया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और ठोस निर्णय की प्रतीक्षा की जाएगी।

सीजेपी के नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक परीक्षा या एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बन चुका है। उनका दावा है कि लाखों छात्र विभिन्न माध्यमों से इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार और प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी को भी सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यातायात व्यवस्था पर आंदोलन का व्यापक असर दिखाई दिया। दिल्ली-गाजियाबाद सीमा सहित राजधानी में प्रवेश करने वाले कई मार्गों पर लंबा जाम लगा। दिल्ली-Meerut एक्सप्रेसवे पर सुबह से वाहनों की धी मी आवाजाही दर्ज की गई क्योंकि दिल्ली पुलिस राजधानी में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच कर रही थी।

सुरक्षा एजेंसियों ने संसद भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और केंद्रीय सचिवालय क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया। कई इलाकों में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई। अधिकारियों के अनुसार संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने के कारण पहले से ही सुरक्षा बढ़ाई गई थी, लेकिन प्रदर्शन को देखते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए गए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीजेपी का आंदोलन अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ सप्ताहों में यह छात्र असंतोष का संगठित मंच बनकर उभरा है और इसका प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि सरकार का कहना है कि शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए पहले से कई कदम उठाए जा रहे हैं तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कार्रवाई की जाएगी।

शाम लगभग पांच बजे तक प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में डटे हुए थे। विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि लगातार भाषण दे रहे थे और आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे। आंदोलन के आयोजकों ने संकेत दिया कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में देशव्यापी कार्यक्रमों की घोषणा की जा सकती है। वहीं प्रशासन की ओर से अपील की गई कि सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखें और कानून का पालन करें।

इस प्रकार सोमवार का ‘चलो संसद’ मार्च केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं बल्कि देश में शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली और युवाओं की आकांक्षाओं को लेकर उभर रही व्यापक बहस का केंद्र बन गया। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलन के बीच संभावित वार्ता तथा उसके परिणाम पर पूरे देश की निगाहें रहेंगी।