Why does Gandhi's message resonate in over a hundred countries?

सौ से अधिक देशों में क्यों गूंजता है गांधी का सन्देश?

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर। विश्व इतिहास में बहुत कम ऐसे महापुरुष हुए हैं जिनकी आभा देश की सीमाओं को लांघकर पूरे भूमंडल पर छा गई। महात्मा गांधी एक ऐसे ही वैश्विक प्रतीक हैं। आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में 300 से अधिक स्थानों पर महात्मा गांधी की मूर्तियाँ, स्मारक और नीली पट्टिकाएँ (Blue Plaques) स्थापित हैं। आप ही सोचिये कि सौ से अधिक देशों में क्यों गूंजता है गांधी का अहिंसा और शांति का सन्देश?

सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA 81) के दौरान फ़िनलैंड के राष्ट्रपति और यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरस द्वारा गांधी जी के विचारों को याद किए जाने के बाद ‘जनसमाचार डॉट कॉम’ अपने पाठकों के लिए दुनिया भर में फैले गांधी स्मारकों की एक विशेष यात्रा लेकर आया है।

अफ्रीका: जहाँ मोहनदास ‘महात्मा’ बने
दक्षिण अफ्रीका वह भूमि है जहाँ गांधी जी ने 21 साल (1893-1914) बिताए और सत्याग्रह का जन्म हुआ।
• जोहान्सबर्ग का ‘गांधी स्क्वायर’: यहाँ 2.5 मीटर ऊँची कांस्य प्रतिमा में गांधी जी को एक युवा बैरिस्टर के कानूनी परिधान (Lawyer’s Gown) में दिखाया गया है।
• पीटरमारिट्ज़बर्ग रेलवे स्टेशन: जहाँ 1893 में रंगभेद के कारण गांधी जी को ट्रेन से फेंक दिया गया था, वहाँ आज एक ऐतिहासिक स्मारक पट्टिका और उनकी प्रतिमा लगी है।
• युगांडा (नील नदी का तट): 1948 में गांधी जी की भस्म का एक भाग विक्टोरिया झील से निकलने वाली पवित्र नील नदी में प्रवाहित किया गया था, जहाँ आज उनकी एक भव्य कांस्य प्रतिमा स्थित है।
अमेरिका और यूरोप: नागरिक अधिकारों का प्रेरणा स्रोत
• वॉशिंगटन डी.सी. और न्यूयॉर्क (यूनियन स्क्वायर): अमेरिका में 25 से अधिक शहरों में गांधी प्रतिमाएँ हैं। अटलांटा में मार्टिन लूथर किंग जूनियर हिस्टोरिक साइट पर गांधी जी की प्रतिमा लगी है, क्योंकि मार्टिन लूथर किंग ने कहा था— “ईसा मसीह ने हमें लक्ष्य दिए और गांधी ने हमें रणनीति दी।”
• लंदन (ब्रिटेन): ब्रिटिश संसद परिसर (पार्लियामेंट स्क्वायर) में गांधी जी की भव्य प्रतिमा स्थित है। इसके अलावा 20 बैरन कोर्ट रोड स्थित उस घर पर ‘ब्लू प्लैक’ (स्मृति पट्टिका) लगी है, जहाँ वे कानून की पढ़ाई के दौरान रहते थे।
• स्विट्जरलैंड और फ्रांस: जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के पास अरियाना पार्क में गांधी जी बैठकर पुस्तक पढ़ते हुए नजर आते हैं। फ्रांस के पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में भी उनकी आवक्ष प्रतिमा मौजूद है।

ओशिनिया: गिरमिटिया मजदूरों के रक्षक
फ़िजी, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे ओशिनियाई देशों में गांधी जी को गिरमिटिया (बंधुआ) मजदूरों के मुक्तिदाता के रूप में देखा जाता है। न्यूज़ीलैंड की राजधानी वेलिंगटन के मुख्य रेलवे स्टेशन के बाहर बापू की आदमकद प्रतिमा लगी है, जो शांति और सहिष्णुता का संदेश देती है।

इस्लामिक दुनिया और मध्य एशिया में सम्मान
मूर्तियों को लेकर भिन्न सांस्कृतिक परंपराओं के बावजूद इस्लामिक देशों में गांधी जी को बहुत आदर प्राप्त है:
• दुबई (UAE): संयुक्त अरब अमीरात के सहिष्णुता मंत्री शेख नाहयान द्वारा भारतीय वाणिज्य दूतावास में गांधी प्रतिमा का अनावरण किया गया। अबू धाबी में ‘ज़ायद-गांधी डिजिटल म्यूजियम’ स्थित है।
• अंकारा (तुर्की) व काहिरा (मिस्र): अंकारा में मुख्य मार्ग का नाम ‘गांधी कैदेसी’ (गांधी स्ट्रीट) रखा गया है, जबकि काहिरा के अल-हुर्रिया पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित है।
• कजाकिस्तान (अस्ताना): अस्ताना के पुश्किन पार्क में बापू की विशाल प्रतिमा मध्य एशिया और भारत के सांस्कृतिक रिश्तों की गवाही देती है।

दुनिया का कोई भी कोना हो—चाहे वह अमेरिका का कैपिटोल हिल हो, अफ्रीका के जंगल हों या यूरोप की ऐतिहासिक इमारतें—गांधी की उपस्थिति यह साबित करती है कि ‘सत्य और अहिंसा’ की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती।

लंदन के Tavistock Square Gardens में महात्मा गांधी की प्रतिमा   Photo: David Dixon / Geograph Britain and Ireland — CC BY-SA 2.0, via Wikimedia Commons