क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली और जिस पर सबसे अधिक शोध (Research) हुआ है, उन चुनिंदा हस्तियों में महात्मा गांधी शीर्ष स्थान पर हैं?
अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस (2 अक्टूबर, 2026) के उपलक्ष्य में ‘जनसमाचार डॉट कॉम’ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि कैसे दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालय और शोध संस्थान आज भी गांधीवादी सिद्धांतों, उनके अर्थशास्त्र और शांति अध्ययन (Peace Studies) पर काम कर रहे हैं।
3 लाख से अधिक अंतर्राष्ट्रीय शोधपत्र
‘गूगल स्कॉलर’ (Google Scholar) और वैश्विक अकादमिक डेटाबेस के अनुसार, महात्मा गांधी के विचारों, सत्याग्रह, अहिंसक आंदोलनों और उनके सामाजिक-आर्थिक दर्शन पर 3 लाख से अधिक पीएचडी थीसिस, रिसर्च पेपर और पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
आज के समय में दुनिया भर के समाजशास्त्री और पर्यावरणविद गांधीवादी दर्शन को मुख्य रूप से तीन कोणों से देख रहे हैं:
1. अहिंसक संघर्ष और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति (Non-violent Conflict Resolution)
2. पारिस्थितिकी और सतत विकास (Ecological & Small-Scale Economics)
3. उत्तर-औपनिवेशिक चिंतन और नागरिक अधिकार (Post-Colonial Human Rights)
दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में स्थापित ‘गांधी पीठ’ (Gandhi Chairs)
भारत सरकार के ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) तथा विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से दुनिया भर के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में ‘गांधी चेयर/पीठ’ की स्थापना की गई है, जहाँ गांधीवादी सिद्धांतों पर विशेष अध्ययन कराया जाता है:
• किंग्स कॉलेज लंदन (UK): युद्ध अध्ययन (War Studies) और अहिंसक संघर्ष समाधान हेतु गांधी पीठ।
• यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (USA): गांधीवादी दर्शन और नागरिक अधिकार आंदोलनों पर शोध पाठ्यक्रम।
• लीडन यूनिवर्सिटी (नीदरलैंड्स) एवं हाइडलबर्ग यूनिवर्सिटी (जर्मनी): यूरोपीय अकादमिक जगत में गांधीवादी सामाजिक चिंतन हेतु विशेष पीठ।
• सस्काचवान यूनिवर्सिटी (कनाडा): गांधी शांति और सतत विकास पीठ।
• यूनिवर्सिटी ऑफ नैरोबी (केन्या) व ताशकंद (उज्बेकिस्तान): अफ्रीका और मध्य एशिया में गांधीवादी साहित्य पर शोध के प्रमुख केंद्र।
कालजयी पुस्तकें: जिन्होंने दुनिया को गांधी से परिचित कराया
गांधी जी के जीवनकाल और उनकी मृत्यु के बाद दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित लेखकों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने उन पर पुस्तकें लिखीं:
1. रोमेन रोलैंड (1924): नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रांसीसी साहित्यकार जिन्होंने फ्रांस से ‘Mahatma Gandhi’ पुस्तक लिखकर यूरोप को पहली बार गांधी के दर्शन से परिचित कराया।
2. लुई फिशर (1950): प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रकार जिनकी पुस्तक ‘The Life of Mahatma Gandhi’ पर आगे चलकर रिचर्ड एटनबरो ने ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ बनाई।
3. एरिक एच. एरिक्सन (1969): अमेरिकी मनोवैज्ञानिक, जिनकी पुस्तक ‘Gandhi’s Truth’ को दुनिया का प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) मिला।
4. रामचंद्र गुहा (2013, 2018): ‘Gandhi Before India’ और ‘Gandhi: The Years That Changed the World’ जैसी आधुनिक कालजयी कृतियाँ।
अंतर्राष्ट्रीय गांधी पुरस्कार: शांति और मानवाधिकारों का वैश्विक सम्मान
दुनिया भर में गांधी जी की स्मृति में प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए जाते हैं:
• अंतरराष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार (भारत): भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला ₹1 करोड़ का वैश्विक पुरस्कार, जो नेल्सन मंडेला, जूलियस न्येरेरे और सुल्तान क़ाबूस जैसे वैश्विक नेताओं को दिया जा चुका है।
• यूनेस्को गांधी पदक (UNESCO, पेरिस): कला और संस्कृति के माध्यम से वैश्विक शांति फैलाने वाली हस्तियों को।
• गांधी शांति पुरस्कार (USA): 1960 से दिया जाने वाला अमेरिकी पुरस्कार, जिससे एलेनॉर रूजवेल्ट और मार्टिन लूथर किंग जी. सम्मानित हो चुके हैं।
अकादमिक जगत का यह व्यापक फैलाव दर्शाता है कि महात्मा गांधी केवल एक दौर के नेता नहीं थे, बल्कि वे विचारों की एक ऐसी बहती नदी हैं जिससे आज भी दुनिया के महानतम दिमाग शांति, न्याय और पर्यावरण संरक्षण का पाठ सीख रहे हैं।
प्रस्तुति: बृजेंद्र रेही (संपादक, जनसमाचार डॉट कॉम)
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