Heavy rain, floods, and landslides in more than 20 states

देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, बाढ़ और भूस्खलन

नई दिल्ली, 6 अगस्त। देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी सक्रियता के साथ कहर बरपा रहा है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर, मध्य भारत और दक्षिणी राज्यों तक लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले चार से पाँच दिनों तक कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, बाढ़, भूस्खलन और आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी की है।

सबसे अधिक चिंता हिमालयी राज्यों और पश्चिमी तट को लेकर है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल और कर्नाटक के कई क्षेत्रों में लगातार वर्षा से नदियाँ उफान पर हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। अनेक सड़कों पर यातायात बाधित है और प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

बाढ़ पीड़ित इलाकों में NDRF की टीमें बचाव एवं राहत कार्यों में निरंतर काम कर रही हैं। इतना ही नहीं 13वीं बटालियन NDRF की स्पेशल माउंटेन रेस्क्यू टीमें श्री अमरनाथजी की पवित्र गुफा में जाने वाले तीर्थयात्रियों की एक्टिव रूप से मदद कर रही हैं और किसी भी इमरजेंसी में तुरंत जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात
उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम और मेघालय सहित कई राज्यों में निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। कई नदियाँ खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं। कुछ स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। भारी वर्षा से जुड़े हादसों में जान-माल के नुकसान की भी खबरें सामने आई हैं।

दिल्ली-एनसीआर भी अछूता नहीं
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुरुग्राम में भी तेज बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव, लंबा ट्रैफिक जाम और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ। कई प्रमुख मार्ग घंटों तक अवरुद्ध रहे। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए भी आगामी दिनों में वर्षा जारी रहने की संभावना व्यक्त की है।

दक्षिण भारत में रेड अलर्ट
केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बनी हुई है। कई जिलों में अत्यधिक वर्षा के कारण नदियाँ उफान पर हैं और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए स्थानीय प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने को कहा है।

पूर्वोत्तर में भी लगातार बारिश
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में लगातार हो रही वर्षा से कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और प्रशासन राहत शिविरों की तैयारी में जुटा है।

मौसम विभाग की चेतावनी
आईएमडी के अनुसार अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। विशेष रूप से उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल और तटीय कर्नाटक में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

राहत और बचाव पर जोर
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा स्थानीय प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं। बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का कार्य जारी है। प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, नदी-नालों के पास जाने से बचने और केवल अत्यावश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।

जनसमाचार विश्लेषण
मानसून भारत की कृषि और जल संसाधनों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन जब वर्षा सामान्य सीमा से अधिक हो जाती है तो वही वरदान बड़ी आपदा का रूप ले लेती है। पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ अधिक बार देखने को मिली हैं। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसूनी चक्र और तीव्र शहरीकरण से भी जोड़ते हैं। शहरों में अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था, नदियों के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को और गंभीर बना देते हैं।

आज की स्थिति एक बार फिर यह प्रश्न उठाती है कि क्या देश केवल राहत और बचाव तक सीमित रहेगा, या फिर बाढ़ प्रबंधन, शहरी जल निकासी, नदी तंत्र के संरक्षण और आपदा-पूर्व तैयारी पर दीर्घकालिक नीति अपनाई जाएगी। मानसून हर वर्ष आएगा, लेकिन यदि तैयारी समय रहते हो तो प्राकृतिक वर्षा को आपदा बनने से काफी हद तक रोका जा सकता है। (जनसमाचार ब्यूरो)