अंतर्राष्ट्रीय बादलदार चीता (क्लाउडेड लेपर्ड) दिवस के अवसर पर भारत ने इस दुर्लभ वन्यजीव के संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए बादलदार चीता संरक्षण कार्य योजना (Clouded Leopard Conservation Action Plan-CAP) लागू की है।
भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की साझेदारी में तैयार यह कार्य योजना जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 91वीं बैठक के दौरान जारी की गई।
नई कार्ययोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बादलदार चीते के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, वन क्षेत्रों के बीच संपर्क (कॉरिडोर) को मजबूत करना, वैज्ञानिक निगरानी को सुदृढ़ बनाना तथा स्थानीय समुदायों को संरक्षण अभियान से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि इस प्रजाति का संरक्षण पूर्वोत्तर भारत की जैव विविधता और वन पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
योजना के तहत पूर्वोत्तर भारत में 14 प्राथमिकता वाले संरक्षण क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में वन आवासों की बहाली, वन्यजीव गलियारों के संरक्षण तथा भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, एकीकृत वन्यजीव आवास विकास (IDWH) योजना के प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में बादलदार चीते को शामिल कर इसके संरक्षण को संस्थागत मजबूती भी प्रदान की गई है।
कार्ययोजना में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया गया है। इसके तहत कैमरा ट्रैप, ऑक्यूपेंसी सर्वे, आनुवंशिक विश्लेषण तथा एनवायरनमेंटल डीएनए (eDNA) जैसी तकनीकों के माध्यम से बादलदार चीते की संख्या, वितरण और आवास संबंधी जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके अलावा वन्यजीव अपराधों और अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा।
जमीनी स्तर पर संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए वनकर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) स्मार्ट एप्लिकेशन सहित आधुनिक डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जाएगा, जिससे वन क्षेत्रों की निगरानी और संरक्षण गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्ययोजना स्थानीय समुदायों की भागीदारी को संरक्षण की सफलता की कुंजी मानती है। इसके तहत समुदाय आधारित संरक्षण कार्यक्रमों, सतत आजीविका के अवसरों तथा जनजागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, बादलदार चीते के पूरे प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र में संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीमा-पार सहयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए इस कार्ययोजना में जलवायु-अनुकूल संरक्षण रणनीतियों और अनुकूली प्रबंधन को भी शामिल किया गया है। इससे भविष्य में बादलदार चीते के आवासों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार का कहना है कि यह संरक्षण कार्य योजना केवल एक दुर्लभ प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के समृद्ध वन क्षेत्रों, जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक प्रौद्योगिकी, सामुदायिक सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के समन्वित प्रयासों से बादलदार चीते के सुरक्षित भविष्य की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
(04 अगस्त, 2026 को अपलोड किया गया)
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