Ukraine War: New Delhi in Contact with Both Russia and Ukraine

यूक्रेन युद्ध, रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में नई दिल्ली

नई दिल्ली,05 सितंबर। रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता और बढ़ा दी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को पोलैंड की राजधानी वारसॉ में कहा कि भारत, रूस और यूक्रेन दोनों के लगातार संपर्क में है और ऐसे विचारों एवं सुझावों की तलाश कर रहा है, जो संघर्ष को कम करने और अंततः समाप्त करने में मदद कर सकें।

जयशंकर ने यह बयान यूक्रेन की राजधानी कीव की अपनी यात्रा के एक दिन बाद दिया। कीव में उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से बातचीत की और राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी। यह किसी स्वतंत्र यूक्रेन की पहली अलग से की गई भारतीय विदेश मंत्री की द्विपक्षीय यात्रा थी।

जयशंकर ने कीव में स्पष्ट कहा था कि भारत लगातार यह मानता रहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है और किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता। उन्होंने कहा कि यदि भारत किसी भी रूप में युद्ध समाप्त कराने में मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के संदेश को भी दोहराया कि अब अंतहीन युद्ध के स्थान पर युद्ध की समाप्ति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। जयशंकर के अनुसार, युद्ध का हर अतिरिक्त दिन और अधिक मौतों, विनाश और वैश्विक स्तर पर आर्थिक लागत को बढ़ाता है।

जेलेंस्की ने भारत के प्रयासों का स्वागत किया

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने जयशंकर की यात्रा के बाद भारत की युद्ध समाप्त कराने की प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भी कहा कि उनका देश कूटनीति के लिए तैयार है और भारत के साथ मिलकर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर काम करना चाहता है।

बातचीत में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। जयशंकर ने कहा कि युद्ध का असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक दक्षिण के अनेक देशों में ईंधन, खाद और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है। भारतीय नाविक भी इस संघर्ष में प्रभावित हुए हैं।

रूसी तेल खरीद पर भी भारत का रुख स्पष्ट

रूस से तेल खरीदने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि युद्ध केवल इस कारण समाप्त नहीं होगा कि कोई देश रूस से तेल खरीदता है या नहीं खरीदता। उनके अनुसार वास्तविक समाधान बातचीत, कूटनीति और वार्ता से ही निकलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को अपनी 1.4 अरब से अधिक आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है और ऊर्जा संबंधी फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किए जाएंगे।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

जयशंकर की यात्रा पर देश में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने यात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत हमेशा विश्व में शांति और अमन चाहता है और युद्ध समाप्त करने का कोई भी प्रयास स्वागत योग्य है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा शासन में विदेश नीति कमजोर हुई है।

हालांकि, इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जयशंकर की कूटनीतिक पहल के परिणाम से अलग देखना होगा। फिलहाल भारत की कोशिश रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संपर्क बनाए रखते हुए बातचीत के लिए रास्ता तलाशने की है।

भारत की मानवीय सहायता भी जारी

जयशंकर ने बताया कि भारत अब तक यूक्रेन को मानवीय सहायता की 19 खेप भेज चुका है, जिनमें करीब 160 टन सामग्री शामिल है। इसमें जनरेटर, दवाइयां और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। भारत-यूक्रेन संबंधों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई है।